Lalach Buri Bala Hai | लालच बुरी बला है, हिंदी प्रेरणादायक कहानी

Lalach Buri Bala Hai in Hindi | लालच बुरी बला है: एक आदमी जिसका नाम राजू था, उसका जीवन बहुत गरीबी में बीत रहा था। वह जंगल से लकड़ियां बीन और काट कर लाता, जिसे बाजार में बेचकर अपना जीवन बिता रहा था।

राजू के दोस्त और रिश्तेदार भी बहुत कम थे। वह एक दिन बहुत उदास बैठा था, तभी उसके पास उसका एक दोस्त आया और बोला क्या हुआ राजू आज तुम जंगल में लकड़ियां लाने नहीं गए?

राजू ने बोला- भाई में अपने इस गरीबी से तंग आ गया हूं, मेरे पास अगर थोड़ी सी जमीन होती तो मैं उसमें खेती कर अपना जीवन बिता लेता, मगर वो भी नहीं कर सकता मेरे इस जीवन में कुछ करने को बचा ही नहीं?

राजू के मित्र ने बोला- तुम उदास मत हो, अभी महाराज के दरबार में प्रजा की परेशानी सुनी जा रहा है, और जीतना हो सके महाराज अपनी प्रजा की मदद भी कर रहे है। तुम भी सुबह जा कर अपनी परेशानी उन्हें बताओं।

राजू अपने मित्र की बात सुनकर प्रसन्न हो जाता हैं और सोचने लगता है, क्यों ना जमीन के साथ-साथ कोई काम भी मांग लूँ। यह विचार कर सुबह होने का इंतजारबेसब्री से करने लगता है। अगली सुबह राजू महाराज के दरबार में अपनी समस्या लेकर पहुंच जाता हैं।

राजू जब दरबार में जाता है तो वहां देखता है लोगों की काफी भीड़ जमा है। सभी अपनी समस्या महाराज को बताते और वहां से दूसरी कतार में चले जाते, राजू का भी जब नम्बर आया, उसने महाराज से अपने जीवन बीताने के लिए कुछ जमींन और कोई रोजगार मांग लिया।

महाराज को राजू की समस्या उतनी भी बड़ी नहीं लगी, दरबार में उपस्थित सलाहकार ने भी महाराज को यहीं बात बोली राजू चाहता तो सिर्फ जमींन या रोजगार मांग लेता तो भी वह अपना जीवन आराम से काट लेता, मगर उसके मन में लालच हैं। इसलिए उसने दोनों चीजें मांगी है।
महाराज ने बोला कोई बात नहीं उस राजू को बुलाओ।

राजू दरबार में दूबारा उपस्थित हुआ। महाराज ने राजू को कहा, कल सूर्योदय होने से पहले तुम महल के पीछे वाले खेत में आना। वहीं तुम्हें जमीन मिलेगा पर याद रहे सूर्योदय से पहले। सभी दरबारी महाराज की बात चुपचाप सुन रहे थे।

राजू खुशी-खुशी अपने घर चला जाता हैं। वह अगली सुबह महाराज के बताए जगह पर उपस्थित हो जाता हैं। वहां महाराज पहले से अपने मंत्री और कुछ सिपाहियों के साथ उपस्थित थे।

राजू को देखते ही महाराज बोले- आ गए राजू, तुम ध्यान से सुनो मेरी बात, सुर्य-उगते ही तुम भागना शुरू कर देना, सुर्य डुबने के पहले तक जीतना दूर दौड़ोंगें वह सारी जमींन तुम्हारी। पर याद रहे तुम जीतना दूर दौड़ोगें, तुम दौड़ सकते हो पर याद रहे लौटकर तुम्हें वापस यहीं आना होगा तभी जमींन तुम्हें मिलेगी।

राजू महाराज की बात सुनते ही खुशी से पागल हो जाता हैं, सुर्य-उगते ही राजू दौड़ना शुरू कर देता है दौड़ते-दौड़ते दोपहर हो जाती है राजू थक जाता है फिर सोचता है थौड़ी दूर और दौड़ लेता हूं कल से में भी महाराज की तरह लोगों को सलाह दिया करूंगा। जिसके पास धन होता हैं लोग उसी से सलाह भी लेते हैं, मेरे पास तो कोई भी नहीं आता जब में भी धनवान हो जाउंगा तो आराम ही तो करनी है।

भागते- भागते राजू बहुत दूर निकल जाता हैं, तभी उसे अचानक याद आता है कि उसे वापस भी लौटना है, तभी जमीन उसे मिलेगी। तब तक राजू थक चूका होता है उसके लाख चाहने से उसके पैर अब उसका साथ नहीं दे पा रहे और राजू जमीन पर गिर जाता हैं और वहीं उसका दम निकल जाता है।

महाराज यह सब दूर से ही देख रहे थे राजू जब जमीन पर गिरा तो महाराज अपने सिपाहियों के साथ राजू के पास उसे देखने आ जाते हैं सिपाही राजू को उठाता है तभी बोलता है महाराज यह तो मर चूका है।

महाराज बोलते हैं- इसे दो गज जमीन चाहिए थी खाम-खा यह इतनी मेहनत कर रहा था। इसकी लालच की वजह से यह मरा है, यह चाहता तो थोड़ी दूर दौड़कर वापस आ जाता और जमीन ले लेता पर इसके मन में हमारा आधा राज्य चाहिए था तभी यह इतनी दूर तक दौड़ आया।

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