Saturday, August 25, 2018

हिम्मत न हारिए - Good moral stories | Hindi Story

Good moral stories

हमेशा से ही Hindi Story के माध्यम से बच्चो को अच्छी शिक्षा दी जाती है. आज हम Good moral stories पढ़ेंगे. जिसको पढ़ने के बाद हमारा Confidence Level बढ़ेगा और साथ ही साथ अपने बच्चे को भी प्रेरित कर सकते है. तो आइये शुरू करते हैं.

एक राजा था. उसका नाम धर्मसिंह था. धर्मसिंह बहुत ही बहादुर था. उसके साहस की उपमा नहीं थी. वह इस बात का पूरा ध्यान रखता था की उसकी प्रजा प्रसन्न तो है, कोई राज- कर्मचारी को कष्ट तो नहीं देता. इस तरह वह हर किसी का ख्याल रखने की कोशिश करता था.

एक बार अचानक ही किसी दूसरे देश के राजा ने धर्मसिंह के राज्य के सीमा पर आक्रमण कर दिया. उसके वीर सैनिकों ने आक्रमणकारियों का बड़ी वीरता के साथ सामना किया, परन्तु सेना में सैनिकों की संख्या काम थी, अतः आक्रमणकारी राजा की ही विजय प्राप्त हुई. धर्मसिंह की सेना हार गई.

धर्मसिंह युद्ध तो हार तो गया मगर हिम्मत न हारी. अपनी पराजय का बदला लेने के लिए उसने पुनः सेना को संगठित किया. सैनिकों को उत्साहित किया और शत्रु पर आक्रमण कर दिया लेकिन उसका दुर्भाग्य. इस बार भी उसे पराजय का मुंह ही देखना पड़ा. इसी प्रकार उसने अनेक बार विजय प्राप्त करने का प्रयत्न किया परन्तु हार बार वह असफल रहा.

अंत में वह दिन भी आ गया कि धर्मसिंह जंगल में एक गुफा में रहने लगा. 

एक दिन वह गुफा में अनमना से लेता हुआ था. दोपहर का समय था और उसे नींद आ रही थी. बीती हुई घटनाएं उसके मन-मस्तिष्क में बार-बार कौंधती रहती थी.

इसी सोच-विचार में ही उसने देखा कि दीवार पर एक चींटी चढ़ रही है. उसके मुंह में अनाज का एक दाना है. 

अभी चींटी कुछ ही ऊपर चढ़ी थी कि दाना उसके मुंह से गिर गया. चींटी नीचे उतरी, अनाज का दाना पुनः उठाया और दीवार पर चढ़ना शुरू कर दिया. लेकिन छत कुछ ही दूर रह गई थी कि फिर गिर गया.

इस प्रकार दाना सोलह बार नीचे गिरा परन्तु चींटी ने हिम्मत नहीं हारी. सत्रहवीं बार वह पुनः मुंह में दाना दबाए ऊपर चढ़ने में सफल हो गई.

इस घटना को देखकर राजा धर्मसिंह के मन में पुनः उत्साह जाग गया. उसने फिर सेना संगठित की, सैनिकों को उत्साहित किया और विजयी राजा पर आक्रमण कर दिया. इस बार उसे विजयी मिली और राज्य पुनः प्राप्त कर लिया.

साथियों, इस लिए कहा गया है "मन के हारे हार है और मन के जीत. जो व्यक्ति मन से हार नहीं माने उसको दुनियां का कोई भी व्यक्ति नहीं हरा सकता है.

"हिम्मत न हारिए बिसारिए न राम को"

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Friday, August 24, 2018

ईमानदारी का इनाम | Positive story in hindi

ईमानदारी का इनाम | Positive story in hindi

एक अच्छी कहानी हमारे जीवन में अमित छाप छोड़ जाती है. आज एक ऐसे ही कहानी Positive story in hindi पढ़िए और अपने बच्चे को सुनाये ताकि वो अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का महत्व जानकर अपनाये.
 

ईमानदारी का इनाम | Positive story in hindi


एक था लकड़हाड़ा. उस लकड़हाड़े का नाम रूपराम था. रूपराम बहुत ही गरीब था. दिन-भर जंगल में सुखी लकड़ियां काटता और शाम को उनका गट्टर बनता और बाजार में जाकर उनको बेच देता. लकड़ी बेचने पर जो पैसे मिलते उससे आटा-दाल, नमक, मसाला आदि खरीदकर घर वापस आ जाता. रूपराम को अपने परिश्रम से पूरा संतोष था.

रूपराम गरीब तो था ही, पर ईमानदार बहुत था. एक दिन वह जंगल में लकड़ी काटने गया. नदी के किनारे एक वृक्ष पर चढ़कर लकड़ी कटाने लगा. लकड़ी काटते समय उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई.

रूपराम पेड़ से उतर आया. नदी के पानी में डुबकियां लगाकर उसने अपनी कुल्हाड़ी ढूंढी मगर उसकी कुल्हाड़ी नहीं मिली. वह दुखी हो, अपना दोनों हाथ से सिर पकड़कर नदी के किनारे बैठ गया. कुल्हाड़ी नहीं मिलने पर उसके आखों से आंसू बहने लगे. उसके पास न तो दूसरी कुल्हाड़ी थी और न ही खरीदने के पैसे. उसे यह चिंता सताने लगी कि कुल्हाड़ी के बिना अब परिवार का पालन कैसे करेगा?

उसी नदी में एक जल देवता रहते थे. उसने रूपराम को इस तरह से दुखी देखकर रूपराम से पूछा- भाई रूपराम, तुम क्यों रो रहे हो?

रूपराम ने उन्हें प्रणाम किया. फिर बोलै -"मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है. कुल्हाड़ी के बिना लकड़ियां नहीं काटी जा सकती है और लकड़ियां काटे बिना मेरे परिवार को रोटी नहीं मिलेगा. ऐसी दुःख से दुखी होकर मैं रो रहा हूं.

देवता बोलें- "रोओ मत, मैं नदी से तुम्हारी कुल्हाड़ी ढूंढ कर ला देता हूं." 

यह कहकर देवता ने नदी में डुबकी लगाई. जब डुबकी लगाकर वे पानी में खड़े हुए तो उनके हाथ में एक सोने की कुल्हाड़ी थी. उन्होंने रूपराम से कहा- "लो अपनी कुल्हाड़ी."

रूपराम ने उस सोने की कुल्हाड़ी देखकर कहा -"भगवन यह तो सोने की कुल्हाड़ी है. मैं कोई धनी आदमी नहीं हूं कि सोने की कुल्हाड़ी से लकड़ी काटूं. यह तो किसी धनी आदमी की कुल्हाड़ी लगती है."

देवता ने उस कुल्हाड़ी को लेकर फिर से डुबकी लगा दी. इस बार उनके हाथ में चांदी की कुल्हाड़ी थी. उन्होंने रूपराम से कहा - "लो, यह होगी तुम्हारी कुल्हाड़ी."

इसपर रूपराम बोला- "शायद मेरे भाग्य में खोट है जो मेरी कुल्हाड़ी नहीं मिल रही. महाराज, आपके हाथ में जो कुल्हाड़ी है वह चांदी की है. यह मेरी नहीं है. वह तो साधारण लोहे की कुल्हाड़ी है. आपने मेरे लिए इतना कष्ट उठाया, पर मेरी कुल्हाड़ी नहीं मिली."

अब देवता ने तीसरी बार डुबकी लगाईं. अबकी बार वो रूपराम की लोहे की कुल्हाड़ी ले आए. उस कुल्हाड़ी को देखकर रूपराम के उदास चेहरे पर प्रसन्नता की आभा चमकने लगी. प्रसन्नता के साथ देवता को धन्यवाद देते हुए उसने अपनी कुल्हाड़ी ले ली.

देवता रूपराम के सच्चाई और ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुए. वे सोने और चांदी की कुल्हाड़ी भी ले आये. उन्होंने रूपराम से कहा- " मैं तुम्हारी सच्चाई और ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हूं. तुम ये दोनों कुल्हाड़ी ले जाओ."

सोने और चांदी की कुल्हाड़ी पाकर रूपराम धनी हो गया. अब उसने लकड़ी काटना छोड़ दिया.

रूपराम के पड़ोसी ने उससे पूछा- "अब तुम लकड़ी काटने क्यों नहीं जाते?"

रूपराम में चल तो था नहीं. सीधे स्वभाव के कारण उसने पड़ोसी को सब सच बात सच-सच बता दी. 

उसके पडोसी के मन में यह बात सुनकर लोग पैदा हो गया. दूसरे ही दिन वह कुल्हाड़ी लेकर उसी स्थान पर लकड़ी काटने गया और पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काटने लगा. उसने जान बूझकर अपनी कुल्हाड़ी नदी में गिरा दी. फिर पेड़ के नीचे उतारकर रोने लगा.

जल देवता रूपराम के पड़ोसी को दंड देने के लिए प्रकट हुए. पडोसी से बात करके उन्होंने नदी में डुबकी लगाई और सोने की कुल्हाड़ी ले आए.

सोने की कुल्हाड़ी देखते ही पड़ोसी चिल्लाया - "यही है मेरी कुल्हाड़ी."

इस पर जल देवता बोले- "तुम झूठ बोलते हो. यह तुम्हारी कुल्हाड़ी नहीं है." देवता ने कुल्हाड़ी पानी में फेंक दी और अदृश्य हो गए. लोभ में पड़ जाने के करना झूठ बोलने से उस पड़ोसी को अपनी कुल्हाड़ी से भी हाथ धोना पड़ा. वह रोता-पछताता हुआ घर लौट आया.

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Thursday, August 23, 2018

Hindi moral stories for class 1 | बच्चों के लिए बेस्ट हिंदी कहानियां

Hindi moral stories for class 1 | बच्चों के लिए बेस्ट हिंदी कहानियां
आज अपने इस पोस्ट के माध्यम से हम बच्चों के लिए कुछ शिक्षाप्रद Hindi moral stories for class 1 पढ़ेंगे. उम्मीद करूंगा की आपके बच्चो के ले लिए यह काफी उपयोगी साबित होगा. 

खट्टे अंगूर कौन खाए | Hindi moral stories for class 1


एक दिन एक भूखी की मारी लोमड़ी बेहाल हुई जंगल में भटक रही थी. वह सारा दिन जंगल में ख़ाक छानती रही, मगर इसके बाद भी उसको कहीं भी एक मांस का सूखा या सड़ा-गला टुकड़ा तक नसीब न हुआ. लोमड़ी बेचारी जहां तहां पानी पीकर पेट भरती और आगे बढ़ जाती.

दिन भर भटकती हुई लोमड़ी एक अंगूर के बगीचे में आ गई. वहां बेलों पर पके हुए अंगूरों के गुच्छे लटक रहे थे. यह देखकर लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया. 

वह अपनी पिछले पैरों पर उछल-उछलकर अंगूर के गुच्छों तक पहुंचने की चेष्टा करने लगी. अंगूर काफी ऊंचाई पर थे, इसलिए हर बार उसकी कोशिश नाकाम हो रही थी. उन्हें पाने के लिए लोमड़ी काफी कूदी-फांदी मगर वह अंगूरों तक नहीं पहुंच सकी.

एक तो भूख के मारे वह पहले ही अधमरी हुई पड़ी थी, दूसरे यहां कई-कई फुट उछलने के कारण उसकी पसलियां हिल गई.

आखिरकार थक कर उसने उम्मीद छोड़ दी और वहां से चलती बनी. जाते-जाते अपने दिल को समझाने के लिए उसने कहा, "अंगूर खट्टे हैं. उं हूं. ऐसे खट्टे अंगूर भला कौन खाये?'


दो मुंह वाली चिड़िया | बच्चों के लिए बेस्ट हिंदी कहानियां


बहुत समय पह्ले की बात है. नंदन वन में एक नन्हीं चिड़िया रहती थी. उस चिड़िया के दो मुंह थे. अपने दो मुंह होने से वह चिड़ियां दूसरे पछियों से बिल्कुल विचित्र दिखती थी. वह चिड़िया एक बड़े से बरगद पेड़ पर घोंसला बना कर रहती थी.

एक दिन वह चिड़िया जंगल में भोजन की तलाश में इधर उधर उड़ रही थी कि अचानक चिड़िया के दायें वाले मुंह की नजर एक लाल फल पर पड़ी. देखते ही उसके मुंह में पानी आ गया और वह तेजी से वो लाल फल खाने को आगे बढ़ी.

अब चिड़िया का दाहिने वाला मुंह बड़े ही मजे से स्वाद से वो फल खा रहा था. बायां मुंह बेचारा बार बार दाएं मुंह की तरफ देख रहा था कि ये मुझे भी खाने को दे लेकिन दायां वाला मुंह चुपचाप मस्ती से फल खाये जा रहा था.

अब बाएं मुंह ने दायां वाले से अनुरोध किया कि थोड़ा सा फल खाने को मुझे भी दे दो. इसपर दाएं मुंह ने गुस्सा होते हुए कहा - कि हम दोनों का एक पेट ही तो है. अब चाहे मैं खायूं या तुम, वह जायेगा तो हमारे पेट में ही न. इस तरह से उसने बाएं वाले मुंह को थोड़ा फल भी खाने को नहीं दिया. इस तरह बाएं वाले मुंह नाराज हो गया.

अब अगले दिन चिड़िया फिर से जंगल में खाने की तलाश में उड़ रही थी. उसी समय बाएं मुंह की नजर एक अदभुत फल पर पड़ी जो बहुत चमकीला था. वह तेजी से उस फल की तरफ लपका. अब जैसे ही वो फल खाने को हुआ तुरंत पास बैठे एक कौए ने चेतावनी दी कि इस फल को मत खाओ ये बहुत जहरीला है.

यह सुनकर दायां मुंह ने चौकते हुए बाएं मुंह से प्रार्थना की कि इस फल को मत खाओ ये हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित होगा. लेकिन बाएं मुंह को तो दाएं से बदला लेना था. इसलिए उसने एक ना सुनी और चुपचाप वह फल खाने लगा. फल खाने के कुछ ही देर में चिड़िया का शरीर मृत होकर जमीन पर गिर पड़ा.

अब आप सोच रहे होंगे कि भला इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है. इसके लिए बता दूं कि एक ही परिवार के दो लोग एक दूसरे से एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं, एक दूसरे से दुश्मनी रखते हैं. कभी कभी तो ईर्ष्या या दुश्मनी इतना बढ़ जाती है कि वो एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की सोचते हैं या एक दूसरे से बदला लेने का सोचते हैं. मगर यह नहीं जानते की उनका ऐसा करने से नुकसान उस दो मुंह वाले पक्षी के तरह पुरे परिवार का ही होता है. इसलिए इस कहानी को पढ़ने के बाद दोस्तों आप लोग आपस में मिलजुल कर रहें, और साथ ही बच्चों को आपसी एकता की बात बतलायेंयही इस कहानी की शिक्षा है.

लालच का फल | Hindi moral stories for class 1 



किसी गांव में एक किसान रहता था. किसान काफी मेहनती तो था मगर उसके साथ ही लालची भी कम नहीं था. वह अपने मेहनत का एक पैसा भी खर्च नहीं करना चाहता था. जब भी उसका मांस खाने का मन होता तो वह जंगल से कोई जीव मार कर लाता और पका कर खा लेता. 

ऐसी क्रम में वह एक दिन जंगल से एक सुनहरी मुर्गी पकड़ कर घर ले आया. उसकी पत्नी मुर्गी देखकर काफी खुश हो गई. मगर जैसे ही उस मुर्गी को काटने के लिए छुरी उठाया तो मुर्गी बोली कि, "मुझे मत मारो, मुझे मत मारो, मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगी. इस तरह से मूर्गी को इंसानी भाषा में बोलते देखकर किसान की पत्नी डर गई और उसने चिल्लाकर अपने पति को बुलाया. सुनो जी,, यह तो कोई मायावी मुर्गी हैं, यह तो हमारी तरह बोलती है.

किसान को पहले तो विश्वास नहीं हुआ. उसने खुद ही छुरी लेकर मुर्गी को काटने चला वैसे ही मुर्गी ने फिर से कहा – अरे ओ मूर्ख किसान. मेरी बात सुन. मेरी जान बक्श दें मैं तुझे मालामाल कर दूंगी. यह सुनकर किसान बोला – अच्छा भला तु मुझे मालामाल कैसे करेगी? तू क्या मुझे मूर्ख समझती हैं? किसान को मुर्गी की बात सुनकर लालच आ गया था.

उसके बाद मूर्गी बोली – मैं रोजाना तुझे एक सोने का अंडा दूंगी, सोने का अंडा मुर्गी की बात सुनकर किसान के मूंह में पानी आ गया. उसने अपनी पत्नी की तरफ देखा. क्या पता यह मूर्गी सच कह रही हो एक बार आजमाने मे हर्ज ही क्या है? अगर बात झुठ निकली तो हलाल तो इसे हम कल भी कर सकते हैं.

इसके बाद किसान को पत्नी की बात जंच गई. उसने मूर्गी को एक बढ़िया दरबे में रखा और अच्छा दाना पानी किया. दूसरे दिन पति-पत्नी ने जैसे ही मूर्गी का दरबा खोला तो यह देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ कि दरबे में सच में सोने का के अंडा पडा था.

किसान ने उसे लपक लिया, फिर तो रोज ही ऐसा होने लगा. वह मूर्गी रोज एक सोने का अंडा देती. कुछ ही दिनों में किसान मालामाल हो गया उसने कच्चे मकान की जगह पककी हवेली बनवा ली, खेतों की देखभाल के लिए नौकर– चाकर रख लिए, कहीं आने-जाने के लिए एक घोडा-बग्गी खरीद ली.

मगर इतना सब होने पर भी किसान की लालच नहीं मिटी. वह चाहता था कि उसके पास और अधिक धन हो क्योंकि वह अभी गांव के जमींदार के बराबर अमीर नहीं हुआ था. जैसे-जैसे वह अमीर होता जा रहा था उसका लालच भी बढ़ता ही जा रहा था.

कभी-कभी वह सोचता कि काश उसकी सुनहरी मूर्गी दो अंडे रोज दे तो वह जल्दी मालामाल हो जायेगा. एक बार उसने सोचा कि शायद मूर्गी के पेट में अंडे ही अंडे भरे पडे हैं मगर यह दुष्ट मूर्गी मुझे केवल एक ही अंडा देती हैं अगर मैं इसका पेट फाडकर सारे अंडे एक साथ निकाल लू तो क्या बुराई है.

ऐसा सोचकर उस लालची किसान ने एक छुूरी उठाई और जाकर मुर्गी को पकड लिया. मुर्गी बहुत गिडगिडाई और उसे समझाया कि किसान तुम ज्यादा लालच मत करो अगर लालच में आकर मुझे मार दोगे तो एक अंडे से भी हाथ धो बैठोगे. मगर किसान का तो खयाल था कि मुर्गी उसे बेवकफूफ बना रही हैं. इसलिए उसने उसकी एक नहीं सुनी और उसका पेट फाड़ दिया. सुनहरी मूर्गी मर गई और एक भी अंडा नहीं निकला. अब तो किसान हाथ मलता रह गया.

दोस्तों एक कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि लालच करने से इंसान की जिंदगी लूट जाती है, और बहुत से लोगों की लूटी भी है. लालच और  तृष्णा दोनों ही ऐसी चीजें है जिनका कोई अंत नहीं लेकिन. इनको पूरा करते-करते इंसान का जरूर अंत हो जाता हैं. इसलिए हमेशा लालच से बचे और अपनी बुद्धि से काम लें.

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Tuesday, August 21, 2018

Kahani in hindi for child | बच्चों के लिए हिंदी में कहानी

Kahani in hindi for child

आज भले ही 4G का जमाना हो मगर बच्चे  हिंदी में कहानी सुनना पसंद करते हैं. अच्छी और प्रेरणादायक कहानी से बच्चों को सीख मिलती है. इसी को ध्यान में रखकर आज बच्चों के लिए हिंदी में कहानी (Kahani in hindi for child) लाये हैं.

आधी रही न पूरी - और शेर भूखा रह गयाKahani in hindi for child 


सुन्दर वन नाम जंगल में एक शेर रहता था. एक दिन जब उसको बहुत जोरों की भूख लगी तो वह इधर उधर किसी जानवर की तलाश करने लगा. इसी क्रम में कुछ ही दूर पर शेर को एक पेड़ के नीचे एक खरगोश का शावक दिखाई दिया. वह पेड़ के छाव में बड़े ही मजे से खेल रहा था. भूख का मारा शेर उस शावक को पकड़ने को दौड़ा. मगर खरगोश शावक ने शेर को अपनी ओर आता हुआ देखा तो अपनी जान बचाने के लिए कुलांचे भरने लगा.


मगर शेर की लम्बी  छलांग का भला वह कैसे मुकाबला कर सकता था. शेर ने मात्र दो छलांग में ही उसे दबोच लिया. फिर जैसे ही उसने उसको गर्दन चबानी चाही, उसको नजर एक हिरन पर पड़ी.

शेर ने सोचा की इस नन्हे खरगोश से मेरा पेट भरने से रहा, क्यों न उस हिरण का शिकार किया जाए. यह सोचकर शेर ने खरगोश के शावक को छोड़ दिया ओर हिरण के पीछे लपका. खरगोश का बच्चा उसके पंजे से छूटते ही नौ दो ग्यारह हो गया. हिरण ने शेर को देखा, तो लम्बी-लम्बी छलांग लगता हुआ भाग खड़ा हुआ. शेर हिरण को नहीं पकड़ पाया.

हाय री - किस्मत. खरगोश भी हाथ से गया और हिरण भी नहीं मिला. शेर खरगोश के बच्चे को छोड़ने के लिए पछताने लगा. वह सोचने लगा की किसी ने सच ही कहा है जो आधी छोड़कर पूरी की तरफ भागते हैं, उन्हें आधी भी नहीं मिलती.

जाको राखे सइयां मार सके न कोई  | Kahani in hindi for child 

एक वृक्ष पर दो पक्षी बड़े आंनद से रहते थे. अपने ऊपर खतरे का उनको बिलकुल भी अहसास नहीं था. एक खतरा तो वह गिद्ध था, जो आसपास में उनके सिरों पर मंडरा रहा था. वह उन दोनों मासूम पक्षियों को अपना भोजन बनाना चाहता था. धीरे-धीरे वह नीचे आ रहा था. बिलकुल इस प्रकार की पछियों को पता न चले.

इधर पेड़ के नीचे एक शिकारी की भी उनपर नजर पड़ चुकी थी. वह भी उनका शिकार करना चाहता था. वह भी उन पक्षियों के सिरों पर मंडरा रहे गिद्ध से बेखबर था.


शिकारी ने के पेड़ से ओट लिया. तीर पर कमान चढ़ाया और खींच दिया. उसका निशाना था वो दो मासूम पक्षी.

शिकारी जिस पेड़ की ओट लेकर खड़ा हुआ था. उसकी जड़ में बनी बांबी में उन पक्षियों का मित्र एक बूढ़ा सांप रहता था. बुढ़ापे के कारण उनके शरीर में जान नहीं बची थी. ऊपर रहने वाले पक्षी भी उसका हाल जानते थे.

अतः सांप के बिना कहे ही वो दोनों उसके लिए जंगल से खाना खोज लाते और चुपचाप उसके बांबी के पास रखकर उड़ जाते थे.

सांप यह सब जनता था इसलिए वह उन दोनों पक्षियों को पिता जैसे प्यार करता था. उसने उस शिकारी को उनपर निशाना साधता हुआ देखा तो उसे बड़ा क्रोध आया कि शिकारी दो मासूमों की जान लेना चाहता है. उसने बिना एक छन्न की देरी किये शिकारी के पांव में काट लिया.


इससे शिकारी बुरी तरह बिलबिला गया. उसका निशान चूक गया और सीधा आसमान में नीचे उतरता हुआ गिद्ध को लगा. गिद्ध भी एक चीख के साथ नीचे आ गिरा. उधर, शिकारी भी धरती पर गिर का मर गया.

इस तरह दोनों को मौत हो गई. इस दौरान उन पछियों को पता ही नहीं चला की क्या हुआ. जबकि अपना काम करके सांप अपनी बांबी में चला गया.

इससे सिद्ध होता है कि दूसरों का भला करने वालों का अंत भी भला ही होता है. पछियों ने सांप के साथ भलाई की तो सांप ने भी उनकी भलाई का बदला भलाई से चुका दिया.

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Saturday, June 9, 2018

जीवन में सच्ची प्रेरणा देने वाली कहानी | True motivational stories in hindi

जीवन में सच्ची प्रेरणा देने वाली कहानी | True motivational stories in hindi

हमारे जीवन में प्रेरणादायक कहानी का बहुत ही गहरा असर होता है. इसी क्रम में आज True motivational stories in hindi में पढ़ें. 

जीवन की सच्ची प्रेरणा देने वाली कहानी | True motivational stories in hindi


बहुत समय पहले की बात है. किसी जंगल में एक सेव का पेड़ हुआ करता था. उस जंगल में एक छोटा सा बच्चा उस पेड़ के साथ रोज खेलने आया करता था. वह छोटा बच्चा कभी पेड़ की डाली से लटकता, कभी फल तोड़ता, कभी उछल कूद करता था. जिससे सेब का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता था.

देखते-देखते कई साल इस तरह बीत गये. अचानक एक दिन बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के नहीं आया, पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर वह नहीं आया. अब तो पेड़ उदास हो गया था.

काफी समय बीत जाने के बाद एक दिन वह बच्चा फिर से पेड़के पास आया पर लेकिन वह पहले से कुछ बड़ा हो गया था. पेड़ उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा. पर बच्चा उदास होते हुए बोला कि अब वह बड़ा हो गया है. अब वह उसके साथ नहीं खेल सकता. बच्चा बोला की, “अब मुझे खिलौने से से खेलना अच्छा लगता है, पर मेरे पास खिलौने खरीदने के लिए पैसे नहीं है”.

पेड़ बोला, “उदास ना हो तुम मेरे फल (सेब) तोड़ लो और उन्हें बेच कर खिलौने खरीद लो. इसके बाद बच्चा खुशी-खुशी फल (सेब) तोड़के ले गया. लेकिन वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया. पेड़ बहुत दुखी हुआ.

अचानक बहुत दिनों बाद बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया, पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा. मगर इस बार लड़के ने कहा कि, “वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता. अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकि मुझे अपने बच्चों के लिए घर बनाना है.”

इसपर पेड़ बोला, “मेरी शाखाएँ बहुत मजबूत हैं तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर बना लो. अब लड़के ने खुशी-खुशी सारी शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया. उस समय पेड़ उसे देखकर बहुत खुश हुआ लेकिन वह फिर कभी वापस नहीं आया. और फिर से वह पेड़ अकेला और उदास हो गया था. 

अंत में वह काफी दिनों बाद थका हुआ वहा आया.

तभी पेड़ उदास होते हुए बोला की, “अब मेरे पास ना फल हैं और ना ही लकड़ी अब में तुम्हारी मदद भी नहीं कर सकता.

वह बच्चा अब बूढ़ा हो चूका था और वह बोला की, “अब उसे कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम से गुजार सके.” पेड़ ने उसे अपनी जड़ो मे पनाह दी और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा.

दोस्तों यही कहानी आज हम सब की भी है. इसी पेड़ की तरह हमारे माता-पिता भी होते हैं, जब हम छोटे होते हैं तो उनके साथ खेलकर बड़े होते हैं और बड़े होकर उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं. तभी वापस आते हैं जब हमें कोई ज़रूरत होती है. धीरे-धीरे ऐसे ही जीवन बीत जाता है. हमें पेड़ रूपी माता-पिता की सेवा करनी चाहिए ना की सिर्फ़ उनसे फ़ायदा लेना चाहिए.

इस कहानी में हमें दिखाई देता है की उस पेड़ के लिए वह बच्चा बहुत महत्वपूर्ण था, और वह बच्चा बार-बार जरुरत के अनुसार उस सेब के पेड़ का उपयोग करता था. ये सब जानते हुए भी की वह उसका केवल उपयोग ही कर रहा है. इसी तरह आज-कल हम भी हमारे माता-पिता का जरुरत के अनुसार उपयोग करते है. और बड़े होने पर उन्हें भूल जाते है. हमें हमेशा हमारे माता-पिता की सेवा करनी चाहिये, उनका सम्मान करना चाहिये. अब चाहे हम कितना भी व्यस्त क्यों ना हो उनके लिए थोडा समय तो भी निकलते रहना चाहिये.

अगर इस कहानी को पढ़कर एक आदमी का भी विचार बदलता है तो समझूंगा कि इस कहानी को लिखना सफल हुआ. उम्मीद करूँगा कि इस कहानी को खुद पर अमल ही नहीं करेंगे बल्कि इसको अपने बच्चों को भी सुनायेंगे. 

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