Hindi Story for Kids | बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ | Short Moral Stories in Hindi

आज हम (Hindi Story for Kids) बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ  (Short Moral Stories in Hindi) शेयर करने जा रहे हैं। यह न केवल बच्चों के लिए लाभदायक होगी बल्कि माता-पिता, शिक्षक, दादा-दादी भी पढ़ सकते हैं. जिससे वो अपने बच्चों को इस कहानी को सुनाकर अच्छी शिक्षा दे सकें।

Hindi Story for Kids बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ

हम अपने इस पोस्ट में बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ (Hindi Story for Kids) पढ़ेंगे। जिससे न केवल हमारा मनोरंजन होंगे बल्कि जिससे हमें अच्छी सीख भी मिलेगी।

एकता में बल है (Hindi Story for Kids)

एक गाँव में राम नाम के एक मुखिया थे। आसपास के गाँव में भी उनकी बड़ा प्रतिष्ठा थी। बड़े ही मौज के साथ उनका समय बीत रहा था। मगर एक बात से वह हमेशा परेशान रहते थे। वह यह कि उनके पाँच बेटे थे और सभी आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे। राम सोचते थे कि यदि इनकी यही आदत रही तो मेरी कमाई हुई प्रतिष्ठा को खो देंगे। साथ ही कोई भी बेइज्जत करता रहेगा।

आखिर सोचते-सोचते राम को एक तरकीब सूझी। एक दिन उसने पाँचों लड़कों को अपने पास बुलाया। जब सब आ गए तो पतली-पतली लकड़ियों का बना हुआ एक गट्ठर उन्होंने उनके सामने रखकर कहा- ’’तुममें से जो लकड़ियों के इस गट्ठर को एक साथ तोड़ देगा, उसे मैं सबसे अधिक संपत्ति दूँगा।’’

पाँचो लड़के एक साथ तैयार हो गए। सभी यह कह रहे थे पहले मै तोडूँगा क्योंकि सबको लग रहा था कि कहीं मेरी बारी आ पाऐगी की नहीं। राम ने आदेश दिया कि सबसे छोटा भाई पहले तोड़ेगा फिर अससे बड़ा फिर उससे बड़ा।

सबने खूब मेहनत कि पर पाँचों भाई में कोई भी नही तोड़ पाया, फिर राम ने पाँचों लड़को को एक-एक लकड़ी दी और कहा- ’’अब अपनी-अपनी लकड़ी तोड़ दो।’’

सबने आसानी से अपनी लकड़ी तोड़ दी। तब राम ने पाँचों बेटों से कहा देखा तुम लोगों ने ?

जब तक ये इकट्ठी बंधी थीं, तुममें से कोई इसे नहीं तोड़ पाया। अब अलग-अलग हो गई तो तुम सब ने इन्हें बड़ी आसानी से तोड़ दिया। यह कहकर राम ने पाँचों बेटों की ओर देखा और कहा- ’’मै ठीक कह रहा हूँ न ?’’

अब तुम्हारी समझ में आ जाना चाहिए कि यदि तुम आपस में मिल कर रहोंगे तो कोई भी तुम से लड़ने के लिए नही सोचेगा और यदि तुम से कोई लड़ता भी है तो वो जीत नहीं सकता जब तक तुम पाँचों मिल कर रहोगें।

यह बात पाँचों पुत्र के समझ में आ गई की एकता में हि बल है। इस शिक्षा के लिए सबने अपने पिता का शुक्रिया अदा किया।

श्रम और रोटी (Hindi Story for Kids) बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ

गुरू नानक जी श्रम और ईमानदारी पर बहुत अधिक बाते लोगों को बताया तथा समझाया करते थे। वे प्रायः लोगों को यही समझाते थे कि मेहनम करो और काम-काज और व्यवहार में ईमानदरी बरतो।

एक बार गुरू नानक जी उपदेश देने के लिए एक गाँव में गए। जब उनका उपदेश समाप्त हो गया तो उन्हें दो व्यक्तियों ने अपने घर भोजन करने के लिए कहा। उनमें एक जमींदार था और दूसरा लोहार। भला एक साथ नानक जी दोनों घरों में कैसे जा सकते थे ?

अतः थोड़ी देर कुछ सोचने के बाद गुरू नानक जी ने दोनों व्यक्ति को भोजन वही ले आने को कहा जहाँ वे ठहरे हुए थे। जमींदार के धर से अच्छे-अच्छे पकवान आए। पर लोहार के घर से मक्के की रोटी और नमक आया।

नानक जी ने दोनों के भोजन को देखा और मक्के की रोटी को नमक से खाने लगे। यह बात जमींदार को अच्छी नही लगी। उसने नानक जी से कहा आपने अच्छे-अच्छे भोजन छोर कर लोहार की लाई मक्के की रोटी क्यों खाई ?

नानक जी ने इस बात का कोई उत्तर नही दिया। उन्होंने एक हाथ में पूरी और दूसरे हाथ में मक्के की रोटी का एक टूकड़ा लिया। उन्होंने पूड़ी को मुट्ठी में रखकर दबाया तो रक्त की बूँदे टपक पड़ीं। लेकिन जब इसी प्रकार रोटी को दबाया तो उसके भीतर से दूध की बूँदे गिरीं। यह देखकर लोगों को बहुत ही आश्चर्य हुआ।

जमींदार और लोहार के भी आश्चर्य की सीमा न रही।

नानक जी ने फिर सबको समझाया- ’’जमींदार की पूड़ी से खून की बूँदे इसलिए टपकीं क्यों कि वह दूसरों के श्रम को चूसकर बनाई गई है। लोहार की रोटी से दूध की बूंदें  इसलिए गिरीं क्यों कि वह मेहनत और ईमानदारी से पैदा किए गए अन्न से बनाई गई है।’’

मेहनत और ईमानदारी के फल को साक्षात देखकर सब लोग हैरान रह गए और गुरू नानक जी के चरणों में गिर पड़े। गुरू नानक जी ने सबकों यह संदेश दिया कि वे श्रम करें और काम-काज में ईमानदारी में काम लें।

राजा चन्द्रसेन और नवयुवक सूरज की कहानी

समुद्र किनारे बसे नगर आम्रलिपि के राजा चन्द्रसेन के पास सूरज नाम का एक युवक नौकरी मांगने आता है। मगर चन्द्रसेन के सिपाही सूरज को उनके पास जाने नहीं देते है। सूरज हमेशा इसी ताक में रहता है कि किसी तरह राजा से मिला जाए।

एक दिन राजा की सवारी महल से निकल कर कहीं जा रही होती है। गर्मी अधिक होने के कारण राजा चन्द्रसेन को बहुत तेज प्यास लग जाती है। बहुत खोजने पर भी उन्हें पानी नहीं मिलता, ऐसा लगता है मानो प्यास से उनकी जान ही निकल जायेगी!

तभी उन्हें रास्ते में खड़ा एक युवक दिखता है। वह कोई और नही सूरज ही रहता है, जो जानबूझ कर पहले से राजा के रास्ते पर मौजूद रहता है। उसे देख राजा उससे पानी मांगते हैं। सूरज फौरन राजा की प्यास बुझा देता है और साथ ही खाने के लिए उन्हें फल देता है। चन्द्रसेन सूरज से प्रसन्न हो पूछते हैं कि वह उनके लिए क्या कर सकते हैं?

सूरज मौका देख अपने लिए नौकरी मांग लेता है। राजा चन्द्रसेन उसे काम दे देते हैं, और कहते हैं कि वो उसका उपकार याद रखेंगे।
सूरज धीरे-धीरे राजा का करीबी बन जाता है। एक दिन राजा उससे कहते है कि हमारे नगर में काफी बेरोजगारी है और पास में एक टापू काफी हरा भरा है। अगर उस टापू पर जा कर खोज की जाए तो हो सकता है हमारे नगर के लोगो के लिए वहां कोई काम निकल आये।

सूरज तुरंत खोजबीन करने का बीड़ा उठा लेता है और राजा चन्द्रसेन से एक नाव और कुछ सहयोगी अपने साथ लेकर समंदर में टापू की और निकल पड़ता है। टापू के पास पहुँचते ही सूरज को एक झंडा पानी में तैरता नजर आता है। उसे देख सूरज तुरंत हिम्मत कर के पड़ताल करने के लिए पानी में कूद पड़ता है।

सूरज अचानक खुद को टापू की जमीन पर पाता है। जहां एक सुंदर लड़की संगीत सुन रही होती है। वह उस टापू की राजकुमारी होती है।
सूरज उसे अपना परिचय देता है और राजकुमारी सूरज को भोजन करने का प्रस्ताव देती है और खाने से पहले एक पानी के छोटे तालाब में स्नान करने को कहती है।

सूरज जैसे ही पानी में नहाने जाता है। वह खुद कों आम्रलिपि के महल में राजा चन्द्र सेन के पास पाता है। और इस चमत्कार को देख चन्द्रसेन भी चकित रह जाते हैं। चन्द्रसेन खुद इस रहस्यमय जगह पर जाने का फैसला कर लेते है और वहाँ जा कर उस टापू को जीत भी लेते हैं। उस टापू की राजकुमारी विजेता चन्द्रसेन को उस टापू का राजा घोषित करती हैं।

जीत की खुशी में राजा चन्द्रसेन उस राजकुमारी से सूरज का विवाह कराने का आदेश दे देते हैं और उस क्षेत्र की रक्षा और प्रतिनिधित्व का भार सूरज को सौप देते हैं। इस तरह चन्द्रसेन सूरज के उपकार का बदला चुकाते हैं।

आपको इन कहानियों (Hindi Story for Kids | बच्चों की मनोरंजक कहानियाँ | Short Moral Stories in Hindi) से क्या शिक्षा मिली। कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइयेगा। इसके साथी ही इसको अपने जीवन में ढालने का प्रयत्न्न कीजिये। जिससे की आपका जीवन सुखमय हो सके.

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