Kisan Aur uske char Bete ki kahani | किसान और उसके चार बेटे कहानी

Kisan Aur uske char Bete ki kahani | किसान और उसके चार बेटे की कहानी : एक गांव में धनीराम नाम का एक किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था, धनीराम के चार बेटे थे।

धनीराम अपने खेत में खेती कर अपना और अपने पुरे परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके चारों बेटे नालायक थे, वह अपना पुरा वक्त गांव में ईधर-उधर घुमने में बिताया करते थे, परन्तु अपने पिता का हाथ बंटाने कभी भी उसके साथ खेत पर नहीं जाते थे।

धनीराम इस बात से परेशान रहता था। वह अपनी पत्नी से हमेशा कहता कि ये लोग कभी भी खेत पर काम करने नहीं आते, इन्हें कृषी की कोई समझ नहीं है, आज तो मैं जिन्दा हूं तो सब कुछ सही चल रहा है, मेरे बाद इनका क्या होगा?

धनीराम की पत्नी को भी यह फिक्र होती पर वह धनीराम को बोलती आप परेशान ना हो समय आने पर यह सब कुछ सीख लेगें।
एक दिन धनीराम की तबियत खराब हो जाती है, धीरे-धीरे वह बहुत बीमार हो जाता है। धनीराम को अपने बेटे और अपनी पत्नी की चिंता बढ़ती जाती है कि अब उनका क्या होगा?

धनीराम ने अपनी पत्नी से कहा कि चारों बेटे को मेरे पास बुलाओ, मुझें उनसे कुछ बात करनी है। तुम भी मेरे पास ही बैठों, धनीराम की पत्नी चारों बेटों को बुलाकर वहीं बैठ जाती है।

धनीराम ने धीरे से अपने बेटों से कहा- सुनों बेटे मैंने अपनी पुरी जिंदगी की कमाई खेत में गार रखी है। मेरे मरने के बाद तुम लोग उस धन को खेत से निकाल कर आपस में बराबर बांट लेना और अपनी बुढ़ि मां भी ध्यान रखना, इनता बोलते ही धनीराम चल बसा।

धनीराम के मरने के बाद उसके बेटे खेत में गए, और सारा खेत को खोद डाला। खेत खोदने के बाद चारों गुस्से से आग बबुला होकर घर वापस आ गए, और अपनी मां को बोलते है- पिताजी जाते-जाते झुठ बोल कर गए है। मां हमसे, हमलोगों ने सारा खेत खोद डाला मगर वहां हमारे खेत में कोई गिरा हुआ धन नहीं मिला।

यह सुनकर उनकी मां बोली तुम्हारे पिताजी ने अपनी पुरे जीवन में यह घर और खेत ही कमाया है, अब जब तुम लोगों ने इतनी मेहनत कर के पूरा खेत खोद ही लिया, तो अब उसमें बीज भी डाल दो।

यह सुनकर चारों बेटे चुप हो गए, और अगले दिन खेत में मां के कहे अनुसार खेत में पानी और बीज डालने चले गए। कुछ समय बाद खेत में फसल तैसार हो गयी। फसल काटने के बाद चारों ने फसल को बाजार में उंचे दाम में बेचा और घर वापस आ कर सारे पैसे अपनी मां को दे दिया।
माँ ने कहा कि बेटा तुम्हारे पिताजी तुम्हें यही समझाना चाहते थे कि जो हम मेहनत करते है। उसके बदले में हमें जो पैसे मिलते है वह कोई खजाने से कम नहीं होता हैं।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती हैं, अगर हमें अपने जीवन में सफल होना हैं, तो हमें मेहनत करनी चाहिए। अगर कोई भी व्यक्ति ज्यादा आलस करता तो वह अपने जीवन का कीमती समय बर्बाद कर रहा होता हैं। आपको हमेशा अपने जीवन में मेहनत करनी चाहिए।

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