Chote Bachcho ke liye Nibandh | छोटे बच्चों के लिए निबंध | Hindi Essay

आज छोटे बच्चे जब स्कुल जाने लगते हैं। ऐसे में जब उनको हिंदी निबंध लिखना सिखाया जाता तो पैरेंट काफी परेशान हो जाते हैं। उनको विभिन्न विषयों पर हिंदी निबंध बच्चों को तैयार कारवाना होता है। जिसके तहत उनको एक गाय पर लेख से लेकर धीरे-धीरे समसामयिक निबंध इन हिंदी, वर्तमान विषयों पर हिंदी में निबंध की जरूरत पड़ती है। उनके इसी जरुरत को ध्यान में रखकर आज हम छोटे बच्चों के लिए निबंध (Chote Bachcho ke liye Nibandh) लेकर आये हैं।

छोटे बच्चों के लिए निबंध | Chote Bachcho ke liye Nibandh

हम इसको काफी सरल भाषा में लिखने का प्रयास किया है। जिससे बच्चों को याद करने और उनके बाद लिखने में आसानी हो। आइये हम एक-एक कर पढ़ते हैं। इसके साथ ही अगर आप इस पेज पर किसी अन्य विषय पर निबंध ऐड करवाना हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताइयेगा।

गाय पर निबंध

गाय एक चौपाया जानवर है. जो कि पालतू जानवरों की श्रेणी में आती है। गाय को चार पैर, दो आंख, एक नाक, दो कान, दो सींग, चार थन, एक बड़ा पेट और एक लम्बी पुंछ होती है। गाय विभिन्न रंगों की होती है जैसे- काली, सफेद, भूरे और चितकबरी आदि रंग की होती है।

गाय घास, भूसा, खल्ली और पेड के पत्ते आदि खाती है। गाय से हमें दूध प्राप्त होता है। उस दूध को हम पीते हैं और चाय, कॉफी में भी इस्तेमाल करते है। दूध से घी, मक्खन, दही, आइसक्रीम और तरह-तरह की मिठाईयां बनती है। जिसे हम खुब पसंद से खाते है। जिसे खाने से हमारे शरीर को बहुत शक्ति मिलती हैं।

गाय की कई प्रजातियाँ होती है, जैसे- सहिवाल, गिरी, देवनी, थरपारकर, सीरी, निमारी, हल्लीकर, मेवाती, कंगायम, कृष्णावेली आदि। गाय से हमें गोबर भी प्राप्त होती है उस गोबर से उपले और खाद बनते है। उपले हम रसोई घरों में खाना बनाने के लिए इस्तमाल करते है और खाद को पेड़, पौधों में डालने से फूल और फल प्राप्त होते है। उस फल को खाकर लोग मजबूत बनते है। गोबर से हमें बिजली भी प्राप्त होती है, गोबर को गोबर गैंस के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है जिस पर भी खाना बनता है।

गाय एक बहुत ही उपयोगी जानवर है। गाय को हिन्दू धर्म में हम माता कहकर बुलाते हैं। गााय संसार के सभी देशें में पायी जाती है। गया बहुत ही सरल स्वभाव की होती है।

बकरी पर निबंध

बकरी एक बहुत ही उपयोगी और घरेलू जानवर है। प्राचीनकाल से बकरियों का उपयोग मानव पालतू जानवर के रूप में करते आ रहे है।

बकरी के चार पैर, दो कान, दो आंख, एक नाक, दो सींग, एक मुंह और एक छोटी पूंछ होती है। इसे ज्यादा झुंड में रहना पसंद होता है। यह जानवर शाकाहारी जानवर होता है। यह पेड़ की पत्तियां, मूलायम और हरी-हरी घास खाना पसंद करती है।

दूनिया भर में बकरियों की बहुत सारी प्रजातियाँ पाई जाती है। यह अपने रंग और आकर से एक दूसरे से अलग होती है। बकरी विभिन्न रंगों की होती है जैसे- सफेद, काली, भूरी, चितकबरी आदि। बकरी जंगल में भी पाई जाती है। जंगल में रहने वाली बकरी की लम्बाई और चौड़ाई में थोड़ी बड़ी होती है। उसके सींग भी नुखीले होती है। बकरी के पूरे शरीर पर घने बाल होते है।

भारत में बकरी पालन बहुत ज्यादा किया जाता है। बकरी दूध देती है। बकरी के दूध में सबसे ज्यादा पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। नवजात शिशु के लिए बकरी का दूध बहुत ही उपयोगी माना जाता है। बकरी के दूध से पनीर और कई प्रकार की दवाईयां भी बनाई जाती है।

बकरी का दूध गाय के दूध से काफी महंगा मिलता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बकरी का उपयोग सामान ढ़ोने के लिए भी किया जाता है।

बकरी को मांसा खाने के रूप में भी लाया जाता है। बकरी के सींग का उपयोग कई सारी बस्तु बनाने के लिए किया जाता है।

भेड़ पर निबंध

भेड़ एक पालतू जानवर है। मनुष्य का इससे संबंध प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। भेड़ को चार पैर, दो कान, दो आंख, एक नाक और एक मुँह होता है। भेड़ सफेद और काली रंग की होती है। भेड़ पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है।

भेड़ एक शाकाहारी जानवर होता है। इसका सबसे प्रिय भोजन हरी-हरी घास है। भेड़ को ढलान से ज्यादा उंची जगहो पर चढ़ना ज्यादा पसंद होता है।

झुंड में रह कर यह खुद को सुरक्षित महसूस करते है। भेड़ की उम्र सात से आठ वर्ष की होती है।

भेड़ के शरीर पर बहुत बाल होते है। भेड़ को दूध, मांस और ऊन के लिए पाला जाता है। भेड़ को अपने झुंड में रहना पसंद होता है।
भेड़ के बाल से ऊन बनाई जाती है। उस ऊन से ठण्ड में उपयोग आने वाली वस्तुयें बनाई जाती है जैसे- स्वेटर, स्कार्प, मौजे, गल्बस, टोपी, सॉल, जेकेट, कम्बल आदि।

भेड़ का दूध भी बहुत लाभदायक माना जाता है क्योंकि इसके दूध में भी प्रोटीन भरपूर रूप से पाया जाता है।

घोड़ा पर निबंध

घोड़ा एक बहुत ही उपयोगी जानवर होता है।

घोड़ा एक वफादार जानवर होता है। यह अपने मालिक को कभी नहीं भूलता है। घोड़ा की सुनने और सूंघने की क्षमता बहुत तीव्र होती है।
घोड़ा को चार पैर, दो आंख, दो कान, एक नाक, एक लम्बी गरदन जिस पर काफी बाल और एक लम्बी पूंछ होती है।
घोड़ा की लंबाई तकरीबन पांच से छः फीट होती है।

घोड़ा काला, सफेद और भूरे रंग का होता है। घोड़ा का जीवन करीब पचीस से तीस वर्ष का होता है।

घोड़ा मैदाना में झुंड के साथ रहना पसंद करता है। घोड़ा एक शाकाहारी जानवर होता है। इसे हरी घास और चना खाना बहुत पसंद होता है।
घोड़ा का शरीर बहुत ही मजबूत होता है। जिससे यह बहुत तेज दौड़ने में सक्षम होता है। घोड़े को बस में रखने के लिए इसके मुंह में लगाम लगाया जाता है।

भारत में घोड़े के बहुत-सी प्रजाती पाई जाती है परन्तु सभी में से अरबी घोड़ा, मारवाड़ी घोड़ा और काठियांवाड़ि घोड़े को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।

पुराने जमाने में यात्रा के लिए घोड़ा गाड़ी का सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता था। इसके अलवा राजा महराजा युद्ध के मैदान में भी घोड़े पर चढ़ कर ही यु़द्ध के लिए जाया करते थे।

घोड़े पर ही शिकार के लिए जाया करते थे। वर्तमान में घोड़े की सीमित प्रयोग ही रह गए है। घोड़े को उपयोग घुड़सवारी के लिए किया जाता है। घोड़ा का उपयोग सर्कस में करतब दिखाने के लिए किया जाता है। अब सेना में भी अब इसका उपयोग उतना नही रहा। जगह-जगह पर घोड़े के रेस का आयोजन किया जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्र में इसका उपयोग तांगा खीचने के लिए भी किया जाता है।

कुत्ता पर निबंध

कुत्ता एक पालतू जानवर होता है।

कुत्ता के चार पैर, दो कान, दो आंख, एक नाक और एक पूंछ होती है। इसके दाँत तेज और नुकीले होते है।

कुत्ते का उम्र लगभग बारह से पंद्रह वर्ष का होता है।

कुत्ता को दुध रोटी और मांस खाना ज्यादा पसंद है।

कुत्ते में सुंधने की बहुत तेज शक्ति होती है। यह दूर से ही अपनी ओर आने वाले हर खतरे को भाप लेता है और तुरंत ही चौकन्ना हो जाता है और साथ ही भौंक-भौंक कर दूसरे को भी चौकन्ना कर देता है।

कुत्ता एक वफादार जानवर होता है। यह हमारी घर की रक्षा करते है। यह पुलिस, आर्मी का हिस्सा बन हमारे देश की सुरक्षा, बचाव कार्य भी करते है।

कुत्ते की कई प्रकार की प्रजाती होती है जैसे- जर्मन शेफर्ड, रोटवीलर, बुलडॉग, लेबरा आदि।

कुत्ता मनुष्य का प्यारा साथी होता है। जिसके पास कुत्ता है वो अपने आप को सेफ महसूस करते है।

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