Chidiya aur bandar ki kahani hindi mein | चिड़िया और बंदर की कहानी

Chidiya aur bandar ki kahani: शहर में एक आदमी रहता था। उसने अपने बचपन से ही घर में एक बंदर और एक प्यारी चिड़िया को पाल रखा था। उस आदमी का नाम जीतू था।

जीतू हमेशा अपना घर एक शहर से दूसरे शहर में बदलता रहता था। उसके पास पैसे बहुत थे, मगर उसके पास ना तो कोई दोस्त और ना ही कोई रिस्तेदार था।

जीतू की दुनियाँ में बस यहीं दोनों थे। जीतू चिड़िया और बंदर को अपने बच्चे की तरह ख्याल भी रखता था। अपना ज्यादा समय जीतू घर पर ही बिताया करता था। यदि घर से बाहर जाना हो तो इन दोनों बंदर और चिड़िया को भी साथ ले जाता था।

जीतू हमेशा बड़ी-बड़ी दूकानें और होटल में ही खाना खाने या सामान खरीदने जाया करता था। दरअसल में ये जीतू एक चोर था। वह बड़े-बड़े होटल और दूकानों में इसलिए आता था। क्योंकि वहां अमीर और पैसे वाले लोग ही आया करते थे।

बंदर और चिड़िया भी उनके पार्टनर थे, और जीतू की चोरी में मदद करते थे। जीतू ने इन्हें बचपन से ही चोरी करने का गुर सिखाया और तैयार किया था।

बंदर तरह-तरह का मुंह बनाकर लोगों को लुभावने हरकत कर, तमाशे दिखता और लोगों का ध्यान अपनी ओर भटका देता और चिड़िया इसी बीच उनका कीमती सामान और गहने या उनके रूम की चाभी चोरी कर लेती थी।

चाभी चोरी करने के बाद चाभी जीतू को दे देती और जीतू उनके कमरे से महंगे सामान बालकनी में चुपचाप रख देता और चाभी चिड़िया को वापस दे देता और चिड़िया उस चाभी को सही जगह पर रख देती। उसके बाद जीतू होटल से अकेला ही निकल कर घर चला जाता। बंदर मौका पाते ही बालकनी में जाकर सामान उठा कर अकेला ही घर ले जाता।

इसी तरह ये तीनों मिलकर आपसी समझ से शहरों में आसानी से चोरी किया करते थे। चोरी करने के बाद जीतू बंदर और चिड़िया को उनके पसंद का खाना खिलाया करता था।

ये तीनों मिलकर लोगों को बेवकूफ बना कर चूना लगाते थे। अगर गलती से शहर में बंदर की चोरी की खबर फैलने लगती तो जीतू शहर ही बदल लेता था। ताकी उन्हें चोरी करने में कोई परेशानी ना हो।

एक दिन बंदर और चिड़िया घर में खेल रहे थे। जीतू सोना चाह रहा था। पर ये दोनों बहुत शोर मचा रहे थे। घर में बंदर से कुछ कीमती सामान गिर कर टुट जाता है। जीतू को बंदर पर बहुत गुस्सा आता है। गुस्से में जीतू ने बंदर को बहुत पिटा और उसको कुछ भी खाने को नहीं दिया।

जीतु की इस हरकत से बंदर और चिड़िया नाराज हो जाते हैं। जीतू शाम को फिर इन दोनों के साथ घर से जब बाहर जाता हैं। तो जीतू को एहसास भी नहीं होता की उसने आज क्या किया हैं।

जीतू जब होटल के अंदर दाखिल होता है तो आज लोगों के खाने की प्लेट बंदर उनके आगे से छिनने लगता हैं। होटल में काफी तमाशा हो जाता है क्योंकि बंदर को भूख लग रही थी वह जीतू की एक बात मानने को तैयार नहीं था।

होटल में जो भी नुकशान हुआ, जीतू ने उसे चुका दिया और घर आकर उसने बंदर को फिर से सजा दी। नाराज बंदर अब मन बना चुका था कि वह अब जीतू के साथ नहीं रहेगा।

बंदर और चिड़िया अब जीतू के पास से आजाद होना चाहते थे। दूसरे शाम जब जीतू एक नये होटल में जाता है। बंदर और चिड़िया को एक साथ देख कर वहां के लोग बहुत ही खुश होते हैं।

थोड़ी देर जीतू के साथ टेबल पर बैठ बंदर वहां से दूसरे टेबल के लोगों के पॉकेट से पर्स निकाल कर सब के सामने जीतू को देने लगता है।
वहां के लोग बहुत ही हैरानी से जीतू को देखने लगते हैं। इतने मैं चिड़िया एक महिला के गले से उसकी चैन निकाल कर जीतू की टेबल पर रख देती हैं।

इसी तरह बंदर और चिड़िया सब की कीमती चीजें लाकर उसको देने लगता है। उसके बाद बंदर एक टेबल पर चढ़ कर लोगों को अपनी चोट दिखाता है। वहां उपस्थित सभी को समझ में आ गया था कि जीतू उन दोनों से चोरी करवाता और उन्हें मारता-पिटता भी है।

जीतू अब उस होटल से निकलाना चाहता था। पर वहाँ सभी ने जीतू को घेर लिया और पुलिस बुलवाई और जीतू को पुलिस के हवाले कर दिया।
जीतू से चंगुल से चिड़िया और बंदर अपनी बहादूरी और समझ के कारण निकल पाए।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं अगर आपको कोई गलत काम आपकी मर्जी के बिना नहीं करवा सकता है। ये बात इन जानवरों ने समझा। मगर हमारे अभी इस समाज में लोग बिना मर्जी का काम चुपचाप करते रहते हैं। आफिस में ही देख लो आठ से दस घण्टा काम करते रहते है। आप खुद सोचो जब ये बिना बोलने वाला जानवर विरोध कर सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?

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