Bachchon ke liye hindi Kahani | बच्चों के लिए हिन्दी कहानी

हम इस बच्चों के लिए हिन्दी कहानी (Bachchon ke liye hindi kahani) में बच्चों को कुछ नया सीखाने की कोशिश कर रहें हैं। आज की दुनियां में ज्यादातर बच्चों को ना तो दादी के साथ और ना ही नानी के साथ रहने का मौका मिल पा रहा है। जबकि हम उनकी कहानियां सुन कर बड़े हुए हैं और कहानी के अंत में जो उससे हमें सीखने को मिला वो आज तक हमारे साथ है। मगर हमारे आज के बच्चों को वो नहीं मिल पा रहा है.

बच्चों के लिए हिन्दी कहानी

हमारे इस ब्लॉग हिंदी चौक की कोशिश है कि बच्चें उन कहानियों से वंचित ना रहें। यह हमारी छोटी सी कोशिश है आपलोगों को उन कहानियों से परिचय करवाने की. आज इसी सिलसिला को जारी रखते हुए-

खरगोश और उसकी मित्रों की कहानी।

एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत हि प्यारा और तंररूस्त था। वह स्वभाव का बहुत ही अच्छा था। उसके जंगल में बहुत सारे मित्र थे।

खरगोश कान के बहुत तेज होते हैं। वह दुर से ही जान लेते है की उनके आस-पास कोई खतरनाक जानवर तो नहीं। खरगोश को जैसे हि कोई खतरनाक जानवर की आवाज सुनाई देता वह सभी जानवरों को चैकना कर देता था। जिससे उनकी जान बच जाती।

इसी स्वभाव के कारण जंगल के जानवर खरगोश से दोस्ती बनाकर रखते थे। एक दिन खरगोश ने कुछ शिकारी कुत्तों की आवाज सुनी। वे जंगल में असी ओर आ रहे थे।

खरगोश बहुत डर गया। अपनी जान बचाने के लिए वह अपने मित्रों के पास सहायता मांगने गया। घोड़े के पास पहुँचकर उसने सारी बात बताई और कहा, “क्या आप मेरी सहायता करेंगे? मुझे अपनी पीठ पर बिठाकर यहाँ से कहीं दुर ले चलिए।”

घोड़े ने कहा, “क्षमा करना भाई, मुझे अभी बहुत काम है।” तुम किसी ओर से मदद लेलों। खरगोश बैल के पास गया और बोला, “मेरी जान पर बन आई है। क्या आप अपने नुकीले सींगों से शिकारी कुत्तों को डरा देंगे?” ताकी वह जंगल से भाग जाए। बैल ने कहा कि उसे किसान की पत्नी के पास अभी जाना है।

खरगोश फिर अपने मित्र भालू के पास गया। उसने भी खरगोश की मदद करने के वजाय उसे अपनी व्यस्तता का बहाना बनाया। खरगोश उसके बाद बकरी के पास जाकर कहा, “बहन, शिकारी कुत्तों से मुझे बचा लो।

”बकरी बोली, “मुझे उनसे बहुत डर लगता है । क्षमा करो, मैं जरा जल्दी में हूँ। मैं खुद अपनी जान कैसे बचाऊँ उस दुविघा मैं हुँ। तुम किसी और से सहायता ले लो।”

शिकारी कुत्ते अब जंगल के बहुत पास आ चुके थे। खरगोश ने फिर सोचा अब किसी से मदद लेने के बजाय मुझे खुद ही अपनी जान बचानी होगी। यह सेचते ही खरगोश जंगल में भागना शुरु किया। भागते-भगते उसे सामने ही उसे एक बिल दिखाई दिया।

उसमें छिपकर खरगोश ने अपनी जान बचाई। और वह वहां बैठा सोचने लगा मैंने इतने सालों सभी को खतरनाक जंगली जानवरों से बचने के लिए कर शोर मचाता था।

भागों- भागों शेर आ गया। बाघ आ गया। और आज जब मुझें इनकी जरूरत हुई तो किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया।

इस कहानी से हमें यह सबक मिलती हैं। की दुसरों पर विश्वास करने से आज खरगोश की जान चली जाती। इसलिए अपनेे आप पर भरोसा होना चाहिए।

लाल मुर्गी की कहानी।

एक गांव में नन्ही लाल मुर्गी रहती थी। उसके तीन प्रिय मित्र थे। कुत्ता, बत्तख, और बिल्ली इन्हीं के साथ लाल मुर्गी भी रहती थी। नन्ही लाल मुर्गी बहुत मेहनती थी। परन्तु उसके दोस्त आलसी थे।

एक दिन उसे एक मक्के का दाना मिला। वह अपने मित्रों के पास आई और बोली यह मक्के का दाना बिल्कुल ही साफ और अच्छा हैं क्यों ना हम इसे बोय और फिर अब इसमें से मक्के का पौधा आ जाएगा और मक्के तैयार हो जाएगा। तो हम सब मिलकर इसे खायगें।

तीनों मित्र नन्हीं मुर्गी पर हंसने लगें और उसका साथ देने से मना कर दिया। मुर्गी ने अकेले ही दाना बोया।

कुछ दिनों के बाद मक्के का पौधा निकला तो लाल मुर्गी बहुत खुश हुई। और अपने मित्रों के पास गई और उसे मक्के के दाने में से पौधा निकला बता रहीं थी। तो तिनों ने उसे बोला अच्छा हैं इतने दिनों के बाद पौधा निकला और मालूम नहीं कब उसमें मक्के लगेगें या नही ?

तुम अतना प्रसन्न मत हो। जब उसमें मक्के लगे तो बताना और फिर तिनों ने लाल मुर्गी का मजाक उड़ाया।

इस बार लाल मुर्गी को अपने दोस्तों पर बहुत गुस्सा आ गया उसने सोचा आज के बाद उन्हें मक्के के बारे में कुछ भी नहीं बोलूंगी। उसके बाद क्या था कुछ दिनों के बाद मक्के के पौधे में से मक्का फला और मुर्गी उसे अकेले हि बहुत प्यार से खाती थी।

कुछ दिनों के बाद लाल मुर्गी ने अकेले ही मक्का काटा। फिर वो उसे चक्की वाले के पास ले गई। चक्की वाला मुर्गी की मेहनत से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने मक्के का आटा पीसा और उसे दे दिया।

घर आकर अपने आलसी मित्रों को शिक्षा देने के लिए नन्ही लाल मुर्गी ने मात्र अपने लिए सूप बनाया और सब देखते रह गए।
और उनके पास बैठ कर पीने लगी।

उसके मित्र ने जब सूप मांगा तो मुर्गी ने कहां यह परिश्रम का फल है जो सिर्फ मुझे ही मिला हैं इस सूप के रूप में और मुस्कुराने लगी।

हाथी और उसकी दोस्ती की कहानी।

एक समय की बात है, एक गाँव के मंदिर में एक हाथी रहता था। उसका नाम राजा था। वह प्रतिदिन सुबह के समय, नदी में स्नान करने जाया करता था। नदी में हाथी पानी के साथ खेलता और फिर स्नान कर मंदिर वापस चला जाता था।

मंदिर वापस जाते समय उसे रास्ते में एक दर्जी की दुकान मिलती थी। वह दर्जी उसे रोज रोकर बड़े प्यार से केला खिलाया करता था। यह उसकी नियमित दिनचर्या थी।

एक दिन दर्जी किसी काम से शहर गया था। दुकान पर दर्जी की जगह उसका बेटा बैठा था। हाथी आया और उसने केले के लिए अपनी सूँढ़ उसकी ओर बढ़ाई।

बेटे को कुछ शरारत सूझी। उसने हाथी की सूंड में सूई चुभो दी। हाथी दर्द से तिलमिलाकर चुपचाप वापस चला गया।

अगले दिन हाथी फिर नदी पर नहाने गया। लौटते समय दर्जी की दुकान पर रुका और केले के लिए सूँढ़ बढ़ाया। इस बार भी लड़के ने उसे सूई चुभो दी।

हाथी को इस बार बहुत गुस्सा आया और उसने अपनी सूँढ़ में कचड़ा भरा और कीचड़ का फव्वारा दर्जी के बेटे पर डाल दिया। उसी समय दर्जी वापस आ गया। और हाथी के पैरों के सामने जान की परवाह ना करते हुए लेट गया अपने बेटे की जान बचाने के लिए।

हाथी दर्जी को अपने पैरों के नीचे देखकर गुस्से को शांत कर लिया। उसके बाद सच्चाई जानकर दर्जी ने अपने पुत्र को डाँटा,

“यह हाथी हमारा मित्र है, उससे क्षमा माँगो” उसके बेटे ने हाथी से क्षमा मांगा और फिर दर्जी ने हाथी को प्यार से अपने हाथों से केले खिलाए। हाथी वापस चला गया।

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