True motivational stories in hindi | जीवन में सच्ची प्रेरणा देने वाली कहानी

हमारे जीवन में प्रेरणादायक कहानी का बहुत ही गहरा असर होता है. इसी क्रम में आज True motivational stories in hindi में पढ़ें.

True motivational stories in hindi | जीवन में सच्ची प्रेरणा देने वाली कहानी

बहुत समय पहले की बात है. किसी जंगल में एक सेव का पेड़ हुआ करता था. उस जंगल में एक छोटा सा बच्चा उस पेड़ के साथ रोज खेलने आया करता था. वह छोटा बच्चा कभी पेड़ की डाली से लटकता, कभी फल तोड़ता, कभी उछल कूद करता था. जिससे सेब का पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता था.
देखते-देखते कई साल इस तरह बीत गये. अचानक एक दिन बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के नहीं आया, पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर वह नहीं आया. अब तो पेड़ उदास हो गया था.
काफी समय बीत जाने के बाद एक दिन वह बच्चा फिर से पेड़के पास आया पर लेकिन वह पहले से कुछ बड़ा हो गया था. पेड़ उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा. पर बच्चा उदास होते हुए बोला कि अब वह बड़ा हो गया है. अब वह उसके साथ नहीं खेल सकता. बच्चा बोला की, “अब मुझे खिलौने से से खेलना अच्छा लगता है, पर मेरे पास खिलौने खरीदने के लिए पैसे नहीं है”.
पेड़ बोला, “उदास ना हो तुम मेरे फल (सेब) तोड़ लो और उन्हें बेच कर खिलौने खरीद लो. इसके बाद बच्चा खुशी-खुशी फल (सेब) तोड़के ले गया. लेकिन वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया. पेड़ बहुत दुखी हुआ.
अचानक बहुत दिनों बाद बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया, पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा. मगर इस बार लड़के ने कहा कि, “वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता. अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्यूंकि मुझे अपने बच्चों के लिए घर बनाना है.”
इसपर पेड़ बोला, “मेरी शाखाएँ बहुत मजबूत हैं तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर बना लो. अब लड़के ने खुशी-खुशी सारी शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया. उस समय पेड़ उसे देखकर बहुत खुश हुआ लेकिन वह फिर कभी वापस नहीं आया. और फिर से वह पेड़ अकेला और उदास हो गया था.
अंत में वह काफी दिनों बाद थका हुआ वहा आया.
तभी पेड़ उदास होते हुए बोला की, “अब मेरे पास ना फल हैं और ना ही लकड़ी अब में तुम्हारी मदद भी नहीं कर सकता.
वह बच्चा अब बूढ़ा हो चूका था और वह बोला की, “अब उसे कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम से गुजार सके.” पेड़ ने उसे अपनी जड़ो मे पनाह दी और बूढ़ा हमेशा वहीं रहने लगा.
दोस्तों यही कहानी आज हम सब की भी है. इसी पेड़ की तरह हमारे माता-पिता भी होते हैं, जब हम छोटे होते हैं तो उनके साथ खेलकर बड़े होते हैं और बड़े होकर उन्हें छोड़ कर चले जाते हैं. तभी वापस आते हैं जब हमें कोई ज़रूरत होती है. धीरे-धीरे ऐसे ही जीवन बीत जाता है. हमें पेड़ रूपी माता-पिता की सेवा करनी चाहिए ना की सिर्फ़ उनसे फ़ायदा लेना चाहिए.
इस कहानी में हमें दिखाई देता है की उस पेड़ के लिए वह बच्चा बहुत महत्वपूर्ण था, और वह बच्चा बार-बार जरुरत के अनुसार उस सेब के पेड़ का उपयोग करता था. ये सब जानते हुए भी की वह उसका केवल उपयोग ही कर रहा है. इसी तरह आज-कल हम भी हमारे माता-पिता का जरुरत के अनुसार उपयोग करते है. और बड़े होने पर उन्हें भूल जाते है. हमें हमेशा हमारे माता-पिता की सेवा करनी चाहिये, उनका सम्मान करना चाहिये. अब चाहे हम कितना भी व्यस्त क्यों ना हो उनके लिए थोडा समय तो भी निकलते रहना चाहिये.
अगर इस कहानी को पढ़कर एक आदमी का भी विचार बदलता है तो समझूंगा कि इस कहानी को लिखना सफल हुआ. उम्मीद करूँगा कि इस कहानी को खुद पर अमल ही नहीं करेंगे बल्कि इसको अपने बच्चों को भी सुनायेंगे.

अनोखा मिलन – मां बेटे की कहानी

हिंदी स्टोरी: पुत्र पुत्रियों के प्रति मां के मन में ममता का होना स्वभाविक है. प्रत्येक मां अपनी संतान के ऊपर अपना सब कुछ निछ्वार कर देती है. इस ममता के कारण कभी-कभी वह अपना कर्तव्य भी भूल जाती है. इसको इस कहानी के जरिये जानेंगे-

राजू की मां उससे बहुत लाड़-प्यार करती थी. इतना कि उसके अपराध को भी अनदेखा कर देती थी. एक बार जब राजू स्कुल में पढता था तो एक दिन अपने किसी साथी की पेंसिल चुरा लाया. वह पेंसिल उसने अपनी मां को दे दी. मां को पूछना चाहिए था कि आखिर वह किसकी पेंसिल ले आया है और वह पेंसिल लेकर उसने अपराध किया है. मगर मां ने ऐसा नहीं किया.

इसके विपरीत वह प्रसन्न हुई और पेंसिल अपने पास रख ली. राजू को उसने कुछ नहीं कहा. इस प्रकार राजू रोज कुछ-न-कुछ, कभी पुस्तक, कभी पेन, कभी स्लेट और कभी कॉपी चुरा लाता. यह उनका रोज का काम बन गया था.

इस सब चीजों को देखकर राजू की मां को प्रसन्नता होती थी. परिणाम यह हुआ कि राजू पढ़ न सका.

ये सब तो बचपन की बातें थी. जब राजू बड़ा हो गया और युवावस्था में पहुंच गया तो नामी चोर बन गया. इसी क्रम में एक दिन वह राजमहल में चोरी करता पकड़ा गया.

जब फांसी लगने का समय आया तो राजू को फांसी के लिए ले जाया गया. शहर की पूरी प्रजा और उसकी मां सब बाहर खड़ा थे.

फांसी के की सजा के नियम के अनुसार राजू से उनकी अंतिम इच्छा पूछी गई.

राजू ने कहा- “मैं एक बार अपनी मां से मिलना चाहता हूं.”

मां को बुलाया गया. रोती-चिल्लाती मां राजू के पास आई.

राजू बोला- ” मां मैं तुम्हारे कानों में एक बात कहना चाहता हूं.”

मां ने बात सुनने के लिए अपने एक कान को राजू के मुंह से सटा दिया. राजू ने मां के कान को इतना जोर से काटा कि खून की धार बहने लगी और कान कट कर अलग हो गया. यह देखकर सब हैरान रह गए.

जब राजू से इसका कारण पूछा तो उसने बताया- “आज का यह दिन मुझे अपनी इस मां के कारण देखा पड़ा है. यदि बचपन में जब मैं स्कुल से पेंसिल चुरा कर लाया था, मेरी मां मुझे डांट देती और स्कूल में पेंसिल को वापस करवा देती तो मैं इतना बड़ा चोर नहीं बन पता और न ही मुझे आज फांसी पर चढ़ना पड़ता.

यह सुनकर मां को इतना पश्चाताप हुआ कि वह वही बेहोश होकर गिर पड़ी.

इस कहानी से हमें यही सीख मिलता है कि “बच्चो को उसकी पहली गलती पर सावधान कर देना चाहिए.” अगर ऐसा नहीं करते हैं तो यह अनदेखी कल उसको गलत रास्ते पर ले जायेगा और हमें पछताने के सिवा कुछ नहीं बचेगा.

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