Tuesday, February 5, 2019

Children Story in Hindi | बच्चों की कहानी हिंदी में | Hindi Stories


हमारे बच्चे के जीवन में अच्छी कहानियां अमित छाप छोड़ती हैं. इसलिए हम तो कहेंगे कि अपने बच्चे को अच्छी-सी-अच्छी कहानियां सुनाया करें. हमारी भी कोशिश है कि आपको इस ब्लॉग HindiChowk.Com के माध्यम से आपके लिए एक से एक Inspirational Hindi Story पढ़ने को मिले. जिससे की आपके, हमारे बच्चे का ही नहीं बल्कि पुरे समाज निर्माण में मदद मिले. इसी सन्दर्भ में इस पोस्ट में आपको Children Story in Hindi | बच्चों की कहानी हिंदी में | Hindi Stories पढ़ने को मिलेगा.

जाको राखे साइयां | Children Story in Hindi |  Hindi Stories 


एक समय की बात है. एक बहेलिया पक्षियों का शिकार करने के लिए जंगल को चल दिया. उसने अपने तीर-कमान हाथ में लिया हुआ था. 

जब वह जंगल पंहुचा तो उसने देखा कि एक वृक्ष पर दो पक्षी बैठे हैं. उन पक्षियों में एक कबूतर और एक कबूतरी थी. वो दोनों पति पत्नी कि तरह रहते थे. 

जैसे ही उन कबूतर और कबूतरी पर बहेलिया की निगाह पड़ी वह प्रसंन्न हो गया. तत्काल उसने तरकश से तीर निकाला और कमान पर चढ़ाकर निशाना साधने लगा.

कबूतर और कबूतरी ने यह देखा तो उनके होश उड़ गए. उन्होंने समझ लिया कि अब इस वृक्ष पर हमारे जीवन का अंत हो जायेगा.

भयभीत कबूतर और कबूतरी वहां से उड़ने की सोच ही रहे थे कि तभी आकाश में एक बाज मंडराने लगा. उसकी निगाह भी इन दोनों पक्षियों पर पड़ गई थी.

यह देखकर कबूतरी का धैर्य जाता रहा. उसने कबूतर से कहा -"प्राणनाथ. अब हमारा बच पाना मुश्किल हैं. नीचे तो बहेलिया तीर का निशाना साधे खड़ा है और ऊपर से बाज हमें झपटने के लिए आकाश में चक्कर काट रहा है."

कबूतर भी निराश था. वह बोला- "प्रिये. मुझे तुम्हारी शंका सच होती दिखाई पड़ रही हैं. अब जो हो, सो हो. प्रभु की ऐसी ही इच्छा है. इसमें हमारा क्या वश चल सकता हैं."

नीचे बहेलिया और ऊपर बाज. कबूतर दम्पत्ती के बच जाने के आसार नहीं.

इसी समय एक आश्चर्जजनक घटना घट गई. एक भयंकर काला विषधर शीघ्रता से सरकता हुआ वहां आ गया. आते ही वह बहेलिया के दोनों पैड़ों में लिपट गया और उसे काट लिया. 

उस विषधर सांप के काटते ही बहेलिया डगमगा गया और उसके मुंह से चीख निकल गई. इस स्थिति में उसकी कमान का तीर तिरछा होकर चल गया और उसने आकाश में उड़ते हुए बाज को भेद डाली. बाज खून से लहू-लुहान जमीन पर गिरकर तड़पने लगा. इस तरह से बाज की बहेलिया की जीवन लीला एक साथ ही समाप्त हो गई.

इस तरह कबूतर-कबूतरी सकुशल बच गए. उनको  कोई  हानि नहीं पहुंची. दोनों प्रसन्न होकर भगवान् का गुणगान करने लगे.

इसलिए कहा गया है, 

"जोको राखे साइयां, मार सके न कोय. 
बाल न बांका कर सके, जो जग बैरी होय.

बड़ों की सीख | Children Story in Hindi |  Hindi Stories


एक बहुत बड़ा जंगल था. जंगल में बहुत से पहाड़ और झरने थे. झरनों का पानी शीतल और स्वच्छ था. जंगल में बहुत से पशु पक्षी रहते थे. उसी जंगल में पहाड़ के एक गुफा में शेर और शेरनी का एक जोड़ा रहता था. उनके दो छोटे-छोटे बच्चे भी साथ रहते थे. शेर और शेरनी उन्हें बहुत प्यार करते थे.

दोनों बच्चे जब अपने मां-बाप के साथ जंगल में घूमते थे तो उन्हें देखकर जंगल के अन्य पशु भाग जाया करते थे.

शेर और शेरनी अपने बच्चों को अपने साथ कम ही ले जाया करते थे. वो दोनों बच्चों को गुफा में ही छोड़कर शिकार की खोज में निकला करते थे. वो दोनों बच्चों को यह भी समझाते थे कि उनको अनुपस्थिति में वो कभी भूलकर भी गुफा से बाहर न निकलें.

बच्चों को छोड़कर शेर-शेरनी जंगल में गए हुए थे. बड़े बच्चे ने छोटे से कहा -"चलो झरने पर चलते हैं. वहां पानी भी पी लेंगे और जंगल में थोड़ा सा घूम फिर भी कर लेंगे. इस बीच कोई हिरण-वीरन दिखाई दिया तो लगे हाथों उन्हें डरने का आनंद भी ले लेंगे."

छोटे बच्चे ने इसका विरोध किया. वह बोला- "पिताजी की आज्ञा है कि हमें इस गुफा से अकेले नहीं निकलना है. झरने के पास जाने से उन्होंने विशेष रूप से मना किया है. तुम रुक जाओ. अभी मां या पिताजी कोई आ जायेंगे."

बड़ा बच्चा बोला - "भाई, मुझे तो प्यास लगी है, अरे, हम शेर के बच्चे हैं. जंगल के सब पशु हमसे डरते हैं. फिर हमें किस बात कर डर?" पर छोटा बच्चा जाने को तैयार नहीं हुआ. उसने कहा -"मैं तो मां-बाप की बात मानूंगा और गुफा से बाहर नहीं जायूँगा. अकेला जाने में मुझे डर लगता है."

बड़ा भाई बोला -"तुम डरपोक हो. नहीं चलते तो मत चलो. मैं तो जाता हूँ. बड़ा बच्चा गुफा से बाहर निकलकर झरने से पास चला गया. उसने भरपेट पानी पिया और हिरणों को खोज में इधर-उधर घूमने लगा.

उस दिन उस जंगल में कुछ शिकारी आये हुए थे. उन्होंने दूर से ही शेर के बच्चे को घूमता हुआ देख लिया. उन्होंने सोचा कि शेर के इस बच्चे को पकड़कर किसी चिड़ियाघर में बेच देंगे और वहां से रुपया प्राप्त कर लेंगे. अंततः उनलोगों ने छुपकर शेर के उस बच्चे को चारो तरफ से घेर लिया. वो सब एक साथ उस पर टूट पड़े. उनलोगों ने कम्बल और कपड़े डाल कर उसे पकड़ लिया.

बच्चा अभी कुत्ते के बराबर भी नहीं हुआ था. बेचारा क्या करता. कम्बल में लपेटकर शिकारियों ने उसे रस्सी से कसकर बाँध दिया, अब न तो वह गुर्रा सकता था और न ही छटपटा सकता था. 

जैसा की शिकारियों का विचार था, उन्होंने सु बच्चे को चिड़ियाघर में बेच दिया. वहां उसे एक कटघरे में बंद कर दिया गया. 

इस स्तिथि में पहुंचकर उसे बड़ा कष्ट हो रहा था. उसे अपने मां-बाप और उसकी सीख याद आ रही थी. वह खीझकर गुर्राता था कर कठघरे की छड़ों का नोचता था, पर इससे क्या हो सकता था? छड़े तो नहीं टूटू सकती थी. 

जब भी वह किसी छोटे बालक हो देखता था, वह बहुत गुर्राता और उछलता था और उछलकर अपनी भाषा में कहता था -"मां-बाप तथा बड़ों की शिक्षा पर अमल अवश्य करना. बड़ों की आज्ञा न मानने से तुम्हे मेरी तरह पछताना पड़ेगा. मैंने बड़ों की आज्ञा नहीं मानी, इसलिए इस कठघरे में बंद होना पड़ा है."

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलता है कि -

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