Tuesday, April 3, 2018

बड़ों की सीख | Learn the elders | Motivational Stories for Kids | Hindi Stories

बड़ों की सीख | Learn the elders | Motivational Stories for Kids | Hindi Stories

बड़ों की सीख | Learn the elders | Motivational Stories for Kids | Hindi Stories 


एक बहुत बड़ा जंगल था. उस जंगल में बहुत से पहाड़ और झरने थे. झरनों का पानी शीतल और स्वस्थ्य था. जंगल में बहुत से पशु पक्षी रहते थे, उस जंगल में एक पहाड़ भी था. उस पहाड़ की गुफा में शेर और शेरनी का एक जोड़ा रहता था. उनके दो छोटे-छोटे बच्चे भी साथ रहते थे. शेर और शेरनी उन्हे बहुत प्यार करते थे. 

दोनों बच्चे जब अपने मां-बाप के साथ जंगल में घूमते थे तो उन्हें देखकर जंगल के अन्य पशु भाग जाया करते थे. शेर और शेरनी अपने बच्चों की अपने साथ कम ही ले जाते थे. वे दोनों बच्चों को गुफा में ही छोड़कर शिकार की खोज में निकला करते थे. वो दोनों बच्चों को यह भी समझाते थे कि भूलकर भी वे कभी गुफा से बाहर न निकलें.


बच्चों को छोड़कर शेर-शेरनी जंगल में गए हुए थे. बड़े बच्चे ने छोटे से कहा- "चलो झरने के पास चलते हैं. वहां पानी भी पी लेंगे और जंगल में थोड़ा-सा घूम-फिर भी लेंगे. अगर रास्ते में कोई हिरण-वीरन देखा गया तो उसे डराने का भी आनंद ले लेंगे".

छोटे बच्चे ने इसका विरोध किया. वह बोला, "पिताजी की आज्ञा है कि गुफा से अकेले मत निकलना. झरने के पास जाने के लिए भी उन्होंने विशेष रूप से मना किया है. तुम रुक जाओ. अभी मां या पिताजी कोई आ ही जायेंगे".

इसपर बड़ा बच्चा बोला, "भई, मुझे तो प्यास लगी है. अरे, हम शेर के बच्चे हैं. जंगल के सही पशु हमसे डरते हैं. फिर हमें किस बात का डर?" पर छोटा बच्चा जाने को तैयार नहीं हुआ. उसने कहा- "मैं तो मां-बाप की बात मानूंगा और गुफा से बाहर नहीं जायूंगा." अकेला जाने ने मुझे डर लगता है.

बड़ा भाई बोला- "तुम डरपोक हो. नहीं चलते तो मत चलो. मैं तो जाता हूं". बड़ा बच्चा गुफा से बाहर निकल झरने के पास चला गया. उसने भरपेट पानी पिया और हिरनों की खोज में इधर-उधर घूमने लगा.

उस दिन उस जंगल में कुछ शिकारी आए थे. उन्होंने दूर से ही शेर के बच्चे को अकेले घूमते हुए देख लिया. फिर उन्होंने सोचा कि इस शेर के बच्चे को पकड़कर किसी चिड़िया घर में बेच देंगे और वहां से पैसा प्राप्त कर लेंगे. इसलिए उन लोगों ने छिप-छिपकर शेर के उस बच्चे को चारो तरफ से घेर लिया. इसकी तनिक भी भनक उस नन्हे से शेर के बच्चे को लगने दी. शिकारियों ने कम्बल और कपडे की सहायता से उस शेर के बच्चे को पकड़ लिया.


वह बच्चा अभी कुत्ता के बराबर नहीं हुआ था. इसलिए वह काफी आसानी से पकड़ में आ गया. वह बेचारा चिल्ला भी नहीं पाया. शिकारियों ने कम्बल में लपेटकर रस्सी से बांध दिया. इसके बाद वह न तो गुर्रा सकता था और न ही छटपटा सकता था.

जैसा कि शिकारियों का विचार था, उन्होंने उस बच्चे को चिड़ियाघर में बेच दिया. वहां उसको एक कठघरे में बंद कर दिया.

इस स्थिति में पहुंचकर उसे काफी कष्ट हो रहा था. उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मां-बाप का कहना न मानने का इतना बड़ा सजा भोगना पड़ेगा. उसे उनकी सीख याद आ रही थी. वह खीझकर गुर्राता था और गुस्से में कठगरे की छड़ों को नोचता था. मगर इससे क्या हो सकता था.? छड़े टूट तो सकती नहीं थी.

जब भी वह किसी छोटे बालक को देखता तो, बहुत गुर्राता और उछलता था. गुर्रा और उछलकर वह अपनी भाषा में कहता था, "मां-बाप तथा बड़े की शिक्षा पर अमल अवश्य करना. अपने से बड़ों की आज्ञा न मानने से तुम्हें मेरी तरह पछताना पड़ेगा. मैंने बड़ों की आज्ञा नहीं मानी, इसलिए इस कठघरे में बंद होना पड़ा."

इसलिए कहा गया है दोस्त कि हमेशा अपने बड़े-बुजुर्गों का कहना मानना चाहिए. वह हमारे भले के लिए ही कहते हैं. जो बड़ों का कहना नहीं मनाता वह इसी शेर की तरह हानि उठता है.

4 comments:

  1. बहुत बढ़िया है. थोडा पोस्ट के अंदर फोकस कीवर्ड का यूज़ जरुर करे. लिखा हुआ कंटेंट काफी अच्छा है.

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    1. आपका बहुत-बहुत धन्यबाद सर. जो आपने अपना कीमती समय निकाल कर मार्गदर्शन किया.

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