Saturday, March 17, 2018

कुछ कष्ट झेल लेने से व्यक्ति का जीवन बन जाता है Hindi Story

कुछ कष्ट झेल लेने से व्यक्ति का जीवन बन जाता है Hindi Story

बहुत समय पहले की बात है. एक बार एक शिल्पकार गांव के पास से गुजर रहा था. उसी दौरान थका- माँदा शिल्पकार लंबी यात्रा के बाद किसी छायादार वृक्ष के नीचे विश्राम के लिये बैठ गया.

थोड़ा आराम के बाद अचानक उसे सामने एक पत्थर का टुकड़ा पड़ा दिखाई दिया. उस शिल्पकार ने उस सुंदर पत्थर के टुकड़े को उठा लिया. अपने सामने रखे अपने औजारों को थैले से निकल लिया और छेनी-हथौड़ी से उसे तराशने के लिए जैसे ही पहली चोट की, पत्थर जोर से चिल्ला पड़ा:- “उफ मुझे मत मारो.”

दूसरी बार वह रोने लगा:- “मत मारो मुझे, मत मारो… मत मारो"

शिल्पकार ने उस पत्थर को छोड़ दिया और अपनी पसंद का एक अन्य टुकड़ा उठाया और उसे हथौड़ी से तराशने लगा.
वह टुकड़ा चुपचाप छेनी-हथौड़ी के वार सहता गया और देखते ही देखते उस पत्थर के टुकड़े मे से एक देवी की प्रतिमा उभर आई. 

इसके बाद उस प्रतिमा को वहीं पेड़ के नीचे रख वह शिल्पकार अपनी राह पकड़ आगे चला गया.

कुछ वर्षों बाद उस शिल्पकार को फिर से उसी पुराने रास्ते से गुजरना पड़ा, जहाँ पिछली बार विश्राम किया था. उस स्थान पर पहुँचा तो देखा कि वहाँ उस मूर्ती की पूजा अर्चना हो रही है, जो उसने बनाई थी.

भीड़ है, भजन आरती हो रही है, भक्तों की पंक्तियाँ लगीं हैं, जब उसके दर्शन का समय आया, तो पास आकर देखा कि उसकी बनाई मूर्ती का कितना सत्कार हो रहा है.

जो पत्थर का पहला टुकड़ा उसने उसके रोने चिल्लाने पर फेंक दिया था वह भी एक ओर में पड़ा है और लोग उसके सिर पर नारियल फोड़कर मूर्ती पर चढ़ा रहे है.

इसके बाद शिल्पकार ने मन ही मन सोचा कि-

"जीवन में कुछ बन पाने के लिए यदि शुरु में अपने जीवन के शिल्पकार (माता-पिता, शिक्षक, गुरु आदि) को पहचानकर, उनका सत्कार कर, कुछ कष्ट झेल लेने से व्यक्ति का जीवन बन जाता है, और बाद में सारा विश्व उसका सत्कार करता है, लेकिन जो डर जाते हैं और बचकर भागना चाहते हैं वे बाद में जीवन भर कष्ट झेलते हैं.

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