Monday, March 12, 2018

कुमति और सुमति: दो बकरियों की कहानी

Two-Goat-Cross-River-Hindi-Story

एक गांव था. उस गांव के पास ही एक जंगल था. गांव और जंगल के बीच में एक नदी थी. उस नदी को पार करने के लिए गांव के लोगों ने एक लकड़ी का पुल बना रखा था. पुल की चौड़ाई बहुत ही कम थी. इतनी कम की उस पुल पर एक बार में एक ही आदमी या पशु जा सकता था.

एक दिन उस पुल पर दोनों तरफ से एक-एक बकरी आ गई. जब दोनों बीच में पहुंच गई तो एक बकरी ने कहा. "तू कहां जा रही है?"

इसपर पहली बकरी ने जबाब दिया, ":मैं अपने घर जा रही हूं."

दूसरी बकरी ने कहा कि मुझे भूख लगी है इसलिए मै पहले पुल पार करूंगी. तू बाद में चली जाना .

पहली बोली, "नहीं, पहले मुझे जाने दे, तू बाद में चली जाना." 

इसपर गुस्से से दूसरी ने कहा, "नहीं-नहीं, मैं पहले जायूंगी.

अब फिर से पहली बोली, "वह, मैं बाद में क्यों जाऊं? मैं तो पहले ही जायूंगी."

इसके बाद क्या था वे दोनों पुल पर ही लड़ने लगी. लड़ते-लड़ते दोनों ही नदी में गिर गई और उसके बाद मर गई.


कुछ दिनों के बाद फिर से उसी पुल पर दोनों तरफ से एक-एक बकरी चलती हुई आई और पुल के बीच में आकर रुक गई. दोनों एक दूसरे से कहने लगी-"पुल की चौड़ाई बहुत ही काम है, अतः दोनों एक साथ तो नहीं पुल पार कर सकते. इसके साथ ही अगर घूमकर वापस जाना चाहे तो वह भी नहीं हो पायेगा. समस्या अब कैसे सुलझाए?"

थोड़ी देर के बाद उनमे से एक बोली-"आपसी सहयोग से बड़ी-बड़ी समस्याएं हल हो जाती है. ऐसा करते हैं कि मैं पैरों को आगे-पीछे लम्बे करके लेट जाती हूं. तुम मेरे ऊपर होकर निकल जाओ. जब तुम निकल जाओगी तो मै भी अपनी दिशा में चली जायुंगी."

"कहो तो पहले मैं लेट जायूं और तुम मेरे ऊपर से पहले निकल जाओ." दूसरी बकरी ने कहा.

इसके बाद एक बकरी लेट गई और दूसरी उसके ऊपर से धीरे-धीरे पैर रखती हुई आगे चली गई.

उसके चले जाने के बाद दूसरी बकरी भी उठकर चली गई. इसप्रकार आपसी सहयोग से दोनों का काम निकल गया. इसलिए तो कहा गया है कि, "जहां सुमति तहँ संपत्ति जाना. जहां कुमति तहँ विपत्ति निदाना."

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