Thursday, March 29, 2018

फांसी और मजाक | Inspirational Hindi Story | स्वतंत्रता संग्राम की कहानी

फांसी और मजाक | Inspirational Hindi Story | स्वतंत्रता संग्राम की कहानी

Hindi Story: यह तब की बात है, जब देश स्वतंत्र हुआ नहीं था. स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ने वाले कई लोगों को अंग्रेज शासकों ने गिरफ्तार कर लिया था. जिनपर मुकदमा चलाकर कई लोगों को फांसी के तख्ते पर लटकाया गया था. 

मुजफ्फरपुर बिहार की जेल की तंग कोठरी में एक नवयुवक बंद था. एक दिन के बाद उनको फांसी लगनी थी. 

अग्रेज जेलर उनके कोठरी के पास से जब घूमता हुआ गुजरा उसे उस नवयुवक कैदी पर दया आ गई. वह कानून से बंधा था फिर भी उसने उसे पके हुए आम को एक लिफाफे से निकल कर उस कोठरी के सरियेदार फाटक में रख दिए और कहा -"घबराओ मत बेटे. यह आम खाओ, बहुत ही मीठे हैं".

जेलर के कहने के बावजूद वह युवक बिना प्रतिक्रिया दिए चुपचाप अपनी जगह बैठा रहा. इसके बाद जेलर एक बार और आम खाने को कहकर चला गया. शाम को वह फिर उस कोठरी के सामने से गुजरा तो उसके आश्चर्ज का ठिकाना नहीं रहा. फाटक के सरिए के बीचो-बिच आम ज्यों का त्यों रखे हुए थे. 

जेलर ने मन ही मन सोचा- "मौत के डरसे शायद युवक ने खाना-पीना छोड़ दिया है".

जेलर ने युवक से कहा- "बेटा. आम उठा लो. खाकर देखो, सचमुच बहुत मीठे हैं."

युवक अपने जगह से फिर से नहीं हिला. चुपचाप दरवाजे के तरफ देखता रहा.

जेलर ने सोचा- "क्यों नहीं मैं ही इसे अपने हाथों से ही आम खिला दूं". फिर उसने कहा "उठो बेटा. आम ले लो."

यह कहते हुए जेलर ने जैसे ही आम उठाने के लिए अपना हाथ लगाया वैसे ही आम पिचक गए.

लेकिन आम पिचके क्यों?
 

बात यह थी कि युवक ने इतनी सफाई से आम का रास चूसकर उसे फिर उनके छिलकों को चतुराई से फुलाकर रख दिया था जिससे कोई जान ही न सके कि वे चूसे हुए आम हैं.

जेलर से मजाक करने के बाद जेल में बंद युवा कैदी अब ठहाका लगाकर हंस रहा था.

जेलर ने देखा कि कैदी इस तरफ से निश्चिंत है कि कल उसे फांसी लग जाएगी.

अब अब यह सोच रहें होंगे कि आखिर कौन था वह युवा कैदी जिसको फांसी लगने के कुछ घंटों पहले हंसी सूझ रही थी. वह था उन्नीस वर्ष की अवस्था का क्रांतिकारी नवयुवक खुदीराम बोस. उसके लिए अपने देश पर मर मिटाना भी एक हंसी का खेल था. 

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