Tuesday, March 6, 2018

बड़ा कौन - स्वामी दयानन्द आर्य Hindi Story


Hindi Story: स्वामी दयानन्द आर्य समाज के संस्थापक थे. उनका स्वभाव बड़ा विनोदी था. मगर कभी-कभी उनका हास्य व्यंग बड़ा तीखा हो जाता था. वह इतना तीखा कि विपक्षी तिलमिला उठता था.

एक बार दयानन्द जी किसी पंडित से मिलने गए. पंडित तो स्वंय तो ऊंचे आसन पर चढ़कर बैठ गए और स्वामी दयानन्द को अपमानित करने के लिए बैठने को नीचा आसन दिया. स्वामीजी उस आसन पर बैठ गए मगर पंडित जी की चालाकी उनके छुपी न रह सकी. पास ही नीम के पेड़ पर एक पेड़ की ऊंची टहनी पर बैठ हुआ कौआ कॉव- कॉव कर रहा था. स्वामी जे ने एक बार उस नीम के पेड़ को देखा, फिर पंडित जी से कहने लगे- "पंडित जी. हम दोनों में कौन बड़ा है?"

इसपर पंडित जी अहंकार में भरकर बोले, "यह भी कोई पूछने की बात है? अरे, बड़े तो हम हैं, इसीलिए तो हम ऊंचे आसन पर बैठे हैं."

दयानन्द ने तुरंत बात काटी- "पंडित जी, हम दोनों से बड़ा वह कौआ है जो नीम के पेड़ के ऊंची टहनी पर बैठा है. आपके कहने के अनुसार ऊंचे आसन पर बैठने वाला ही बड़ा होता है, तो इस समय वह कौआ ही सबसे ऊंचे आसन पर बैठा है. हैं न?"

फिर क्या था, पंडित जी दयानन्द की बात सुनकर खिसिया गए और स्वंय को लज्जित अनुभव करने लगें. मगर जो लोग यह सुन रहे थे वे ठहाका लगाकर हंसने लगे. इसलिए कहा गया है कि "बड़ा वही जो छोटा होने में भी प्रसन्न है".

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